केआरएल कंपनी नगर निगम से दो करोड़ रुपये लेने के बाद भी आज तक सराय गांव में कंपोस्ट प्लांट को तैयार नहीं कर पाई है। प्लांट का काम पूरा करने के लिए कई समय बढ़ाने के बाद कंपनी ने खुद 15 दिसंबर से शुरू करने की बात कही थी। जिस गति से काम चल रहा है उससे एक महीने बाद भी प्लांट शुरू होने की उम्मीद कम है।
सराय गांव में ट्रेचिंग ग्राउंड में शहर का कूड़ा फेंका जा रहा है। इस कूड़े के निस्तारण के लिए यहां कंपोस्ट प्लांट बनाया जा रहा है। यह काम केआरएल कंपनी को दिया गया है। कंपनी ने कंपोस्ट शेड, कंक्रीट का यार्ड तो लगभग तैयार कर लिया है। ब्रिज भी दो एक दिन में लगने वाला है, लेकिन अभी जरूरी मशीनरी नहीं आई हैं। यूं तो नगर निगम की सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट की इस कूड़ा निस्तारण परियोजना को शुरू करने के लिए कंपनी ने पहले अप्रैल फिर अक्तूबर और फिर 15 दिसंबर का समय नगर निगम को दिया था। कंपनी अभी तक नगर निगम से दो करोड़ रुपये ले भी चुकी है। इसके अलावा स्थानांतरित नगर आयुक्त नरेंद्र सिंह क्वीरियाल ने बुधवार को नगर निगम छोड़ने से पहले कंपनी के बकाया टिपिंग शुल्क के नाम पर 25 लाख रुपये का भुगतान भी किया है।
नोटबंदी से प्रभावित हुआ काम
केआरएल के प्रबंधक मनोज शर्मा का कहना है कि नोटबंदी से कंपोस्ट प्लांट का काम प्रभावित हुआ है। प्रतिदिन की मजदूरी के भुगतान पर असर पड़ा है। प्रतिदिन के खर्चे के लिए एक लाख रुपये की जरूरत होती है। कंपोस्ट प्लांट में देरी से लागत भी प्रभावित हो रही है। निर्माण लागत 3 करोड़ 63 लाख रुपये निर्धारित है, परंतु इससे अधिक लागत आने की उम्मीद है। नगर निगम ने टिपिंग शुल्क देने में भी हीलाहवाली करता है। उसने बकाया 63 लाख 17 हजार रुपये में से मात्र 25 लाख रुपये का भुगतान ही किया है। इससे कंपनी का काम चलता नहीं है। 15 लाख रुपये एडवांस के साथ प्लांट की मशीनरी का आर्डर दिया जा चुका है। कंपनी 15 जनवरी तक प्लांट को शुरू कराने की कोशिश कर रही है।
कूड़ा एकत्रीकरण सेंटर को जगह नहीं
सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट परियोजना के तहत घर-घर से कूड़ा कलेक्शन किया जाना है। इसके लिए नगर निगम को विभिन्न क्षेत्रों में कूड़ी एकत्रीकरण सेंटर बनाने के लिए जगह उपलब्ध करानी थी, जहां से कंपनी की गाड़ियों को कूड़ा उठाकर प्लांट में ले जाना था, लेकिन नगर निगम ने जगह उपलब्ध नहीं कराई है। कंपनी प्रबंधक का कहना है कि इस स्थिति में कूड़ा सीधे सराय में ले जाना पड़ेगा।