शहर के अधिकांश पार्कों की स्थिति बदहाल है। रख-रखाव के अभाव में पार्कों के अंदर घास उग गई है। जबकि यहां लगे झूले भी टूट गए। कुछ समय पहले बने पार्कों की हालत भी खस्ताहाल हो चली है। पार्कों की देख-रेख नगर निगम और एचआरडीए के जिम्मे है। लेकिन रख-रखाव कितना होता है ये पार्कों की बदहाल हालत बयां कर रही है। एचआरडीए का दावा है कि शहर के सभी पार्कों के सौंदर्यीकरण का कार्य जल्द शुरू होगा।
उत्तरी हरिद्वार, मध्य हरिद्वार, कनखल, ज्वालापुर सहित विभिन्न इलाकों में 150 से ज्यादा पार्क बने हुए हैं। जिसमें अधिकांश पार्कों की देखरेख हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण (एचआरडीए) और नगर निगम करता है। लेकिन इनमें 40 से ज्यादा पार्कों की हालत बेहद ही दयनीय स्थिति में है।
रविवार को पार्कों की पड़ताल के दौरान सामने आया कि अधिकांश पार्कों में घास उग गई है। जबकि दीवारें टूटी-फूटी होने के साथ ही बेंच क्षतिग्रस्त और झूले टूटे हुए पड़े हैं। कुछ पार्कों का कुंभ के दौरान सौंदर्यीकरण कराया गया था। लेकिन कुछ सालभर के अंदर ही इन पार्कों की स्थिति भी खराब होने लगी है। शिवलोक कॉलोनी में बने पार्क की हालत खराब है। यहां घास उगी होने के साथ ही दीवारें क्षतिग्रस्त थी।
इसी तरह से शिवलोक कॉलोनी फेस-एक में पार्क की हालत है। यहां गेट ही नहीं है। पार्क के अंदर ही आसपास के लोगों ने वाहन खड़े किए हुए हैं। जबकि फेस-दो में भी पार्क की स्थिति बदहाल पड़ी हुई थी। मायापुर स्थित निर्मल सराय में पार्क के मुख्य द्वार पर लगा दरवाजा क्षतिग्रस्त हो गया है। यहां लगे झूलें टूट गए। अंदर घास उगी है। मुख्य द्वार के बाहर ही वाहन खड़े होने से पार्क के अंदर जाने का रास्ता भी बंद है।
पार्कों का रख-रखाव करने में विभागों की भी अनदेखी रहती है। जबकि स्थानीय लोग भी अपनी जिम्मेदारी समझते हुए इन्हें सही रखने में सहयोग नहीं करते हैं। जिस वजह से इनकी स्थिति खराब हो गई है।
- रोहित चौहान
कुंभ के दौरान जिन पार्कों का सौंदर्यीकरण हुआ था उनकी हालत भी खराब हो रही है। पुराने पार्कों का तो हाल ही बिल्कुल खराब है।
- विनीता वर्मा
पार्कों के सौंदर्यीकरण की योजना तैयार कर ली गई है। टेंडर प्रक्रिया पूरी हो गई है। जल्द कार्य शुरू होने वाला है।
- उत्तम सिंह चौहान, सचिव एचआरडीए