स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) को अब नए नाम से जाना जाएगा। एसओजी की बजाय अब क्रिमीनल इंटेलीजेंस यूनिट (सीआईयू) अंडर कवर ऑपरेशन को अंजाम देती नजर आएगी। एसएसपी कृष्ण कुमार वीके ने बाकायदा नई यूनिट के आदेश जारी कर दिए है।
वर्ष 2000 में एसओजी वजूद में आई थी। उस वक्त यूपी का जमाना था और मोबाइल फोन कुख्यातों के पास अपने नेटवर्क को धार देने के लिए नया हथियार था। वे मोबाइल फोन पर रंगदारी वसूल रहे थे। पुलिस भी तब कुख्यातों के इस नए हथियार से निपटने के लिए जूझ ही रही थी। इसलिए एक स्पेशल दस्ते का गठन कर उसे एसओजी का नाम दे दिया था। तब से अब तक एसओजी सीधे पुलिस कप्तान को ही रिपोर्ट करती आई है। हरिद्वार एसओजी के इतिहास में कई गुडवर्क शामिल हैं। जब एसओजी बनी थी तब केवल कुख्यातों का खात्मा ही एकमात्र मकसद था, लेकिन मौजूदा वक्त में हर छोटे-बड़े केस का प्रेशर एसओजी ही झेल रही थी। लिहाजा, क्रिमीनल इंटेलीजेंस सिस्टम बेहद ही कमजोर हो चला था। बात को महसूस करते हुए नए पुलिस कप्तान ने एसओजी को धरपकड़ दस्ते की छवि से बाहर निकालने की कोशिश की है। एसएसपी कृष्ण कुमार वीके ने बताया कि एसओजी की तरह ही सीआईयू कार्य करेगी। बकौल एसएसपी कि, क्रिमीनल की हर हरकत के संबंध में विंग को जानकारी होनी चाहिए, इस दिशा में भी कार्य करने के निर्देश दिए गए है।