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...तो कई शिक्षक होंगे बाहर

Sun, 27 Dec 2015 12:03 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, हरिद्वार
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हरिद्वार। उत्तराखंड संस्कृत विवि में शिक्षकों और कर्मचारियों की भर्ती में हुए फर्जीवाडे़ की जांच रिपोर्ट को कार्यपरिषद की बैठक में रखा गया। बैठक में जांच रिपोर्ट का परीक्षण करने के लिए कमेटी का गठन किया है। कार्यपरिषद की अगली बैठक में इस पर निर्णय लिया जाएगा। कार्रवाई हुई तो कई शिक्षक और कर्मचारी बाहर का रास्ता देख सकते हैं।
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प्रदेश में संस्कृत की उन्नति और प्रचार प्रसार के लिए हरिद्वार में उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय की स्थापना की गई थी। पांच साल पहले विवि में शिक्षकों और कर्मचारियों की स्थायी भर्ती हुई थी। इस प्रक्रिया पर शुरू से ही उंगली उठती रही। कई बार अलग अलग स्तर से जांच भी हो चुकी है। इस साल फिर शासन स्तर पर जांच हुई और विवि के कुलाधिपति होने के नाते राज्यपाल को जांच रिपोर्ट कार्रवाई करने के लिए भेजी गई। लेकिन राजभवन की ओर से जांच रिपोर्ट शासन को यह कहते वापिस भेज दी गई कि इस पर या तो शासन कार्रवाई करें या फिर विवि की कार्यपरिषद। शासन ने रिपोर्ट पिछले महीने उत्तराखंड संस्कृत विवि को भेजी थी। लेकिन राज्यपाल की अनुमति के लिए बिना कार्यपरिषद की बैठक नहीं बुलाई जा सकती थी। विवि प्रशासन से राजभवन को पत्र लिखकर कार्यपरिषद बैठक के लिए अनुमति मांगी।

राजभवन की ओर से बैठक की अनुमति देने के बाद 26 दिसंबर को हरिद्वार के स्थानीय होटल में बैठक आयोजित की गई। इसमें सात पदाधिकारी और सदस्य उपस्थित रहे। कार्यपरिषद के सदस्य पुरुषोत्तम अग्रवाल जो संघ लोकसेवा आयोग के सदस्य रह चुके हैं कि अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन किया गया। यह कमेटी जांच रिपोर्ट के तथ्यों का परीक्षण करेगी। कार्यपरिषद की अगली बैठक में रिपोर्ट पर निर्णय लिया जाएगा। यदि जांच रिपोर्ट पर कार्रवाई हुई तो कई शिक्षक और कर्मचारियों की विदाई हो सकती है। कुलसचिव गिरीश कुमार अवस्थी ने बैठक में हुई कार्रवाई की पुष्टि की। कार्यपरिषद की बैठक में अध्यक्ष और विवि के कुलपति डा. महावीर अग्रवाल, कुलसचिव गिरीश कुमार अवस्थी, वित्त नियंत्रक डा. तंजीम अली और प्रो. ओमप्रकाश डिमरी आदि उपस्थित रहे।
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ये लगे थे आरोप
शिक्षकों की भर्ती में गुणांक से ज्यादा अंक दिए जाने, साक्षात्कार में नियमों के विपरीत अंक देने, अनुभव के अंकों का नियम विरुद्ध दिया जाना शामिल थे। कुछ शिक्षकों की पीएचडी की डिग्री नियुक्ति विज्ञापन के बाद अवार्ड होने की शिकायतें तक की थी। कई पर मानक पूरे नहीं होने के आरोप शिकायत में लगाए गए थे।
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