सरकारी स्कूलों में नए साल से गरीब बच्चों को स्मार्ट क्लास का तोहफा मिलने जा रहा है। नई तकनीक से बच्चों को स्मार्ट क्लास में पढ़ाने के लिए नीति आयोग की ओर से जनपद के 54 स्कूलों को दो करोड़ का बजट भी जारी कर दिया गया है। इससे सरकारी स्कूलों के लिए बच्चे भी पब्लिक स्कूलों की तर्ज पर शिक्षा ग्रहण कर सकेंगे।
नीति आयोग की ओर से जनपद के चयनित सरकारी स्कूलों में स्मार्ट क्लास शुरू करने को स्वीकृति दी गई है। योजना के तहत कक्षा एक से 12 तक के स्कूलों के बच्चों को स्मार्ट क्लास में पढ़ाया जाना है। जनपद के प्रत्येक ब्लॉक से दो-दो राजकीय इंटर कॉलेज, दो हाईस्कूल, दो-दो जूनियर हाईस्कूल व 3-3 राजकीय प्राथमिक विद्यालयों का चयन करते हुए कुल 54 स्कूलों को योजना में शामिल किया गया है।
चयनित स्कूलों में स्मार्ट क्लास के लिए एक-एक कक्ष तैयार किया जाना है। स्मार्ट क्लास के कक्ष को प्रोजेक्टर, स्क्रीन, इंटरक्टिव बोर्ड, कंप्यूटर, कुर्सी, मेज, मैट और पर्दे लगाकर सुसज्जित किया जाना है। इस कक्ष में बारी-बारी से हर कक्षा के बच्चों को आधुनिक तकनीकी से पढ़ाया जाना है। शिक्षा विभाग के जिला संदर्भ व्यक्ति डॉ. संतोष कुमार चमोला ने बताया कि स्मार्ट क्लास शुरू करने के लिए स्कूलों में उपकरण लगवाने के लिए टेंडर मांग लिए गए हैं। 14 दिसंबर को टेंडर खोल दिए जाएंगे। टेंडर होते ही स्मार्ट क्लास में सुविधाएं उपलब्ध कराने का कार्य शुरू कर दिया जाएगा। जिससे उम्मीद की जा रही है कि नया साल से बच्चों को स्मार्ट क्लास में शिक्षा ग्रहण करने का अवसर मिल जाया करेगा। संवाद
स्कूलों की छतों पर लगेंगे सोलर पैनल
शिक्षा विभाग के जिला संदर्भ व्यक्ति डा. संतोष चमोला ने बताया कि स्मार्ट क्लास चलाने के लिए स्कूलों के भवनों पर सोलर पैनल भी लगाए जाएंगे। कई बार ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली की आपूर्ति ठप हो जाती है। ऐसे में स्मार्ट क्लास चलाने में दिक्कत हो सकती है। इसके लिए सोलर पैनल लगाया जाएगा।
राजकीय स्कूलों के बच्चों को नई तकनीकी से शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिल सकेगा। वह भी पब्लिक स्कूलों की तरह पढ़ाई कर सकेंगे। इससे स्कूलों में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं की शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार हो सकेगा।
- डॉ. विद्या शंकर चतुर्वेदी, मुख्य शिक्षा अधिकारी, हरिद्वार