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Haridwar News: गंगनहर बंदी से हरकी पैड़ी पर पानी की कमी

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- 18 दिनों की वार्षिक बंदी के दौरान नहर से सिल्ट ओर गंदगी की होती है सफाई
- कई राज्यों में पेयजल आपूर्ति पर भी व्यापक असर पड़ेगा
माई सिटी रिपोर्टर
हरिद्वार। गंगनहर की वार्षिक बंदी के कारण इस बार फिर हरकी पैड़ी पर गंगा जल की उपलब्धता प्रभावित हुई है। दशहरा की रात से नहर बंद कर दी गई है, जो दिवाली से पहले तक करीब 18 दिनों तक जारी रहेगी। इस बंदी से श्रद्धालुओं को जल विहीन स्थिति का सामना करना पड़ेगा और कई राज्यों में पेयजल आपूर्ति पर भी व्यापक असर पड़ेगा।
हरिद्वार के भीमगोडा बैराज से निकलने वाली ऊपरी गंग नहर की वार्षिक बंदी हर साल दशहरे से दिवाली के बीच लगभग 18 से 20 दिनों के लिए की जाती है। यह बंदी वार्षिक रखरखाव, सिल्ट सफाई और मरम्मत के लिए होती है। इसका सीधा प्रभाव उत्तर प्रदेश और दिल्ली-एनसीआर की पेयजल आपूर्ति पर पड़ता है।
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दिल्ली को अपनी पेयजल आवश्यकताओं के लिए गंग नहर से प्रतिदिन लगभग 500 क्यूसेक पानी मिलता है। बंदी के दौरान दिल्ली जल बोर्ड को इस कमी की भरपाई के लिए यमुना नदी के पानी या भूमिगत जल स्रोतों पर निर्भर रहना पड़ता है।
वहीं, गाजियाबाद के प्रताप विहार और सिद्धार्थ विहार स्थित जल शोधन संयंत्र पूरी तरह गंग नहर के पानी पर निर्भर हैं। इससे नोएडा और गाजियाबाद के लाखों घरों में पानी का दबाव कम हो जाता है या कुछ समय के लिए आपूर्ति ठप हो जाती है। नहर बंदी के दौरान पानी की आपूर्ति पूरी तरह बंद नहीं की जाती है। इस दौरान सिल्ट साफ करने का काम चलता है। नहर में विभिन्न नालों का अशोधित पानी मिलने के कारण पानी मटमैला और दूषित हो जाता है। इसके परिणामस्वरूप, जल शोधन संयंत्रों को पानी साफ करने में अत्यधिक कठिनाई होती है।
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पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिलों पर प्रभाव
उत्तर प्रदेश के करीब 15 से 19 जिले भी इस बंदी से प्रभावित होते हैं। इनमें मेरठ, मुजफ्फरनगर, बुलंदशहर, बागपत, हापुड़, अलीगढ़ और फिरोजाबाद जैसे जिले शामिल हैं। इन जिलों में पेयजल और सिंचाई दोनों प्रभावित होती हैं। शहरी क्षेत्रों में जहां पेयजल की किल्लत होती है, वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में मवेशियों के पीने के पानी का संकट खड़ा हो जाता है।
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बयान...
गंगनहर बंदी से पूर्व उन जिलों को सूचित कर दिया जाता है, जिसके आधार पर वह वैकल्पिक व्यवस्था कर लेते हैं। - भारत भूषण, एसडीओ सिंचाई विभाग, उत्तर प्रदेश
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