जैसे-जैसे महाशिवरात्रि का पर्व नजदीक आ रहा है वैसे-वैसी कुंभनगरी में शिवभक्तों की संख्या बढ़ती जा रही है। सोमवार को भी हरकी पैड़ी से जलभर लाखों कावंड़ियों ने वापसी की। सुबह से देर शाम तक यह सिलसिला चलता रहा। सोमवार शाम को भी मेरठ, मुरादाबाद, बिजनौर और मुजफ्फरनगर से बड़ी संख्या में कांवडिए हरिद्वार पहुंच गए थे।
दशमी और एकादशी के दिन सबसे बड़ी वापसी प्रतिवर्ष होती है। दूसरे राज्यों को जाने वाले कांवड़िए इन दोनों दिन लगातार लौटते हैं। इस बार गंगा पार नीलधारा के रास्ते रविवार को प्रारंभ हुई बड़ी वापसी सोमवार को पूरे दिन जारी रही। भगवान शंकर का दिन होने के कारण हजारों कांवड़िए दक्षेश्वर और बिल्वकेश्वर के मंदिरों में दर्शनार्थ पहुंचे। कांवड़ियों जत्थे ऋषिकेश के वीरभद्र और नीलकंठ भी गए। वहां से लौटकर सायंकाल इन कांवड़ियों की वापसी भी शुरू हो गई है। मालवीय द्वीप पर देर शाम तक कांवड़ भरने वालों का तांता लगा हुआ था। जल भरकर कांवड़िए शिव सेतु और शताब्दी सेतु के रास्ते रोड़ी मैदान होते हुए चंडीघाट से वापस लौट रहे हैं। हरिद्वार जनपद में चिड़ियापुर तक कांवड़ियों की लंबी कतारें लगी हुई हैं। कांवड़ मेले के इस चरण में भीमगोड़ा, हरकी पैड़ी, अपर रोड, विष्णुघाट, लोअर बाजार क्षेत्र और रेलवे रोड सबसे भीड़ वाले क्षेत्र बन गए हैं। भीमगोड़ा पुल के रास्ते भी कांवड़ियों का आगमन और वापसी बराबर हो रही। पंतद्वीप का मैदान कांवड़ियों से भरा है।
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फाल्गुन नहीं रहता श्रावण जैसा डर
फाल्गुन और श्रावण यात्रा में शामिल शिवभक्तों में बहुत अंतर दिखने को मिलता है। श्रावण की कांवड़ यात्रा के दौरान हर समय किसी अनहोनी और झगड़े का डर बना रहता है। जबकि इनके मुकाबले फाल्गुन के कांवड़िए पूरी तरह शांत रहते हैं और किसी भी प्रकार की परेशानी बाजार के लिए उत्पन्न नहीं करते। यद्यपि किसी भी दुकानदार ने रेट लिस्ट नहीं लगाई है, फिर भी शहर की गतिविधियों सामान्य रूप से चल रही हैं। कहीं किसी तरह का कोई विवाद नहीं होता।