गौरैया संरक्षण को लेकर अमर उजाला की ओर से चलाई गई मुहिम अब विदेशों तक पहुंच गई है। इंटरनेट के माध्यम से देश-दुनिया में अमर उजाला की खबरें पढ़कर अप्रवासी भारतीय भी इस अभियान से जुड़ रहे हैं। फिलिपिंस से फोन कर एक अप्रवासी भारतीय ने गौरैया बचाने के लिए सलाह मांगी जबकि दुबई से फोन करने वाले एक पक्षी प्रेमी ने अभियान की सराहना की।
गुरुकुुल कांगड़ी विवि की पक्षी विविधता एवं संवाद प्रयोगशाला से जुड़े वरिष्ठ वैज्ञानिक डा. विनय कुमार सेठी के पास मंगलवार को फिलिपिंस से राजेश जोशी का फोन आया। डा. सेठी ने बताया कि जोशी वहां आईटी सेक्टर में काम करते हैं। उन्होंने फोन पर बताया कि वह नियमित रूप से इंटरनेट पर अमर उजाला का ई-पेपर पढ़ते हैं।
वहीं पर उन्होंने गौरैया संरक्षण को लेकर चलाए जा रहे अभियान के बारे में पढ़ा। अमर उजाला से उन्होंने पक्षी वैज्ञानिक डा. विनय कुमार सेठी का मोबाइल नंबर हासिल किया। राजेश जोशी ने बताया कि फिलिपिंस में उनके घर में एसी लगाने वाले स्थान पर गौरैया ने घोंसला बनाया है। लेकिन गौरैया के लिए यह खतरनाक जगह है।
लिहाजा वह घर में घोंसला लगाकर गौरैया को शिफ्ट करना चाहते हैं। उन्होंने हरिद्वार से एक घोंसला भिजवाने की मांग की है। इसके लिए वह कीमत चुकाने को भी तैयार हैं। पक्षी वैज्ञानिक डा. विनय सेठी ने उन्हें बताया कि घोंसला भेजने में काफी खर्च आएगा। बेहतर होगा कि आप घोंसला बनाने की विधि जान लें और वहीं घोंसला तैयार करवा लें।
डा. सेठी की ओर से उन्हें मेल पर घोंसला बनाने की पूरी जानकारी भेजी। राजेश जोशी ने बताया कि वह फिलिपिंस में घोंसले तैयारकर कराकर पड़ोसियों को भी बाटेंगे। डा. विनय कुमार सेठी ने बताया कि दुबई से भी मुुनीश्वर गोस्वामी ने फोन कर अभियान की सराहना की है। उन्हें भी इंटरनेट के माध्यम से अमर उजाला के अभियान के बारे में पता चला।
मातृसदन का अभियान को समर्थन
गंगा और पर्यावरण की रक्षा के लिए काम करने वाले मातृसदन के संतों ने भी गौरैया संरक्षण की मुहिम को समर्थन दिया है। पक्षी वैज्ञानिक डा. विनय कुमार सेठी ने मातृसदन जाकर परमाध्यक्ष स्वामी शिवानंद सरस्वती और ब्रह्मचारी दयानंद को गौरैया के घोंसले भेंट किए।