गौरैया की सुरक्षा के लिए अब संत समाज भी आगे आया है। इनका कहना है कि शास्त्रों में भी विभिन्न स्थानों पर गौरैया का वर्णन किया गया है। पर्यावरण शुद्धि में महत्वपूर्ण गौरैया कीटों का सेवन कर मनुष्य को कई बीमारियों से बचाती है।
गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय स्थित पक्षी संवाद केंद्र प्रयोगशाला के पक्षी वैज्ञानिक डा. विनय सेठी ने बुधवार को श्री दक्षिणकाली मंदिर पहुंचकर पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद ब्रह्मचारी महाराज को घोंसला भेंट किया। उसके बाद उन्होंने चंडी पुल के निकट स्थित अखाड़ा परिषद के प्रवक्ता बाबा हठयोगी को उनके आश्रम में जाकर घोंसला प्रदान किया।
इस दौरान स्वामी कैलाशानंद ब्रह्मचारी ने कहा कि पर्यावरण की शुद्धि में गौरैया की महत्वपूर्ण भूमिका हैं। गौरैया का वर्णन विभिन्न धर्म-शास्त्रों में भी मिलता है। उन्होंने गौरैया बचाव अभियान को पवित्र कार्य बताया। चंडी पुल के निकट स्थित आश्रम में अखाड़ा परिषद के प्रवक्ता बाबा हठयोगी ने कहा कि गौरैया प्रकृति का आभूषण है।
उन्होंने गौरैया संरक्षण के लिए वैज्ञानिक विधि से बने घोंसलों की प्रशंसा की। कहा कि गौरैया कीटों का सेवन कर मनुष्य को कई बीमारियों से बचाती है। वह भी गौरैया संरक्षण को अपने आश्रम में घोंसले लगाएंगे। ताकि मनुष्यों के बीच जीवन यापन करने वाली गौरैया के अस्तित्व को खतरे से बाहर निकाला जा सके।