कश्मीर के हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। इन हालात पर जहां देश भर में चिंता है, वहीं संत समाज भी बेहद चिंतित है। संतों का कहना है कि अब सख्त कदम उठाकर पाकिस्तान को सबक सिखाने का समय आ गया है। दुश्मनों का मुकाबला करने के लिए स्वयं संत भी सीमा पर जाने को तैयार हैं। व्यवस्था में योगदान देने के लिए नागा संन्यासियों के दल भी भेजे जा सकते हैं।
शारदा पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी राजराजेश्वराश्रम महाराज ने कहा कि आजादी के तत्काल बाद से पाकिस्तान भारत को रौंदने में जुटा है। सभी प्रकार की कोशिशें नाकाम हो गई। अनेक सरकारों ने पाकिस्तान से लंबी मंत्रणाएं कर संघर्ष टालने की भरपूर कोशिश की। इसके बावजूद पाकिस्तान ने कश्मीर के भ्रमित युवकों को प्रशिक्षित करना नहीं छोड़ा। सेना की चौकसी के बावजूद कई क्षेत्रों से आतंकवादियों का प्रवेश जम्मू कश्मीर में कराया जा रहा है। पत्थरबाजी जिस तरह बढ़ रही है, वह बहुत चिंताजनक है। सेना मौजूद होते हुए भी बड़े संयम का परिचय दे रही है। स्वामी राजराजेश्वराश्रम ने कहा कि जो सेना अनेक युद्धों में दुश्मनों को धूल चटा चुकी है, वह चाहे तो उदंड युवकों को दो दिन में सबक सिखा सकती है। सेना नहीं चाहती कि दुश्मन के बजाय अपने देशवासियों का खून धरती पर गिरे। लेकिन हालात ऐसे हो गए हैं कि बगैर सख्ती किए काम चलने वाला नहीं है। जगद्गुरु ने उम्मीद जताई कि भारत सरकार अब पाकिस्तान को कड़ा सबक सिखाने के लिए तत्काल घोषणा करेगी।
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत नरेंद्र गिरी ने कहा कि कश्मीर के हालात से समूचा धर्म जगत बेहद चिंतित है। दिनों दिन स्थिति खराब हो रही है तथा कोई भी प्रयास शांति बहाल करने में सफल नहीं हो पाया है। कुछ माह पूर्व हरिद्वार में हुई अखाड़ा परिषद की बैठक में संतों ने प्रस्ताव पारित किया था कि परिषद सीमाओं पर नागा संन्यासियों को भेजने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि यदि व्यवस्था बनाने में सरकार संतों और नागाओं का सहयोग लेना चाहे तो हमारी फौज तैयार खड़ी है। भारत सरकार और भारतीय सेना का मनोबल इस समय ऊंचा रहना चाहिए। पाकिस्तान हर कीमत पर भारत की अर्थव्यवस्था बिगाडना चाहता है। नरेंद्र गिरी ने कहा कि अब सीधे फैसले का समय आ गया है।