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‘समन्वय से समतामूलक समाज संभव’

Mon, 30 May 2016 12:31 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला हरिद्वार
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हरिद्वार। भारत माता मंदिर के संस्थापक निवृत्त शंकराचार्य स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि ने कहा कि भारत समन्वयवादी देश है जहां पर विभिन्न धर्मों और संप्रदायों की अच्छी बातों को आत्मसात कर भारत में समतामूलक समाज की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। समन्वय वह मूल मंत्र है जिसके द्वारा समतामूलक समाज की स्थापना हो सकती है।
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सत्यमित्रानंद गिरि रविवार को उत्तरी हरिद्वार स्थित श्री लाल माता मंदिर के स्थापना दिवस समारोह के उपलक्ष्य में एक सप्ताह से चल रही श्रीमद्भागवत कथा के समापन समारोह पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा कल्किकाल का कल्पतरू है। इसकी छाया में ज्ञान, भक्ति और वैराग्य तीनों की प्राप्ति होती है। श्री गंगा के पावन तट पर इस तरह के अनुष्ठानों से आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार होता है जो संपूर्ण विश्व का कल्याण करती है। स्वामी परमानंद महाराज ने कहा कि माता लाल देवी भगवान श्रीकृष्ण की परम उपासक थीं। उन्होंने ही अमृतसर, दिल्ली और हरिद्वार में वैष्णो माता मंदिर के प्रतिरूप लाल मंदिर निर्मित करवाकर श्रद्धालु भक्तजनों को धार्मिक अनुष्ठान करवाने के लिए सुविधा संपन्न स्थान उपलब्ध कराए। इस अवसर पर युग पुरुष स्वामी परमानंद के उत्तराधिकारी स्वामी ज्योतिर्मयानंद का संत समाज और आश्रम की ओर से भव्य स्वागत किया गया। लाल देवी मंदिर के प्रबंधक भक्त दुर्गादास, भावना बेन जनक भाई ठक्कर और श्रीमद्भागवत कथा के व्यास रसिक भाई वीर राजगुरू ने संतों का स्वागत किया। इस अवसर पर महंत रामचरन दास, आचार्य योगेंद्रानंद शास्त्री, पं. गोपालकृष्ण बडोला, स्वामी विद्यानंद सरस्वती, महंत विजयानंद सरस्वती समेत कई संत मौजूद रहे।
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