हरिद्वार। जिलाधिकारी हरबंस सिंह चुघ के आश्वासन पर साधु-संतों ने बुधवार को अपना क्रमिक अनशन समाप्त कर दिया। बीते छह दिन से उत्तरी हरिद्वार के विभिन्न घाटों पर गंगा जल लाने की मांग को लेकर अखिल भारतीय सनातन संत समाज समिति के बैनर तले साधु-संत अनशन पर थे।
भूमा निकेतन घाट पर साधु-संतों को संबोधित करते हुए जिलाधिकारी हरबंस सिंह चुघ ने कहा कि संतों की भावनाओं को ठेस नहीं पहुंचने दी जाएगी। जल विहीन घाटों पर गंगा जल लाने की शीघ्र व्यवस्था की जाएगी। 10 दिनों के अंदर हर हाल में गंगा से जुड़े सभी अधिकारियों से वार्ता कर गंगा को शीघ्र घाटों पर लाया जाएगा। इस अवसर पर भूमापीठाधीश्वर स्वामी अच्युतानंद तीर्थ ने कहा कि गंगा की निर्मल धारा को लेकर केंद्र और राज्य सरकार गंभीर नहीं है। नमामि गंगे के नाम का सहारा लेकर सरकार ने आज तक गंगा की अविरलता और निर्मलता के लिए कुछ नहीं किया। पूर्व केंद्रीय गृह राज्य मंत्री स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती ने कहा कि गंगा की अविरलता और निर्मलता को लेकर यदि संतों को अपना बलिदान भी देना पड़े तो, संत इससे भी पीछे नहीं हटेंगे। पूर्व पालिकाध्यक्ष सतपाल ब्रह्मचारी ने कहा कि जल विहीन घाटों की दुर्दशा को लेकर जल्द ही मुख्यमंत्री हरीश रावत से मुलाकात की जाएगी। भारत माता मंदिर के स्वामी ललितानंद व निर्धन निकेतन के स्वामी ऋषिरामकृष्ण ने कहा कि संतों की मांग आस्था के अनुरूप है। स्वामी भैरव गिरि, स्वामी आत्मानंद को डीएम ने जूस पिलाकर संतों का क्रमिक अनशन समाप्त कराया। अध्यक्षता स्वामी अच्युतानंद तीर्थ और संचालन श्रीमहंत विनोद गिरी ने की। इस अवसर पर महामंडलेश्वर स्वामी प्रेमानंद, महंत विनोद महाराज, स्वामी ज्ञानानंद महाराज, स्वामी दयालानंद, स्वामी उपेंद्रदास, श्रीमहंत अराधना गिरी, श्रीमहंत मीरा गिरी, स्वामी विजय कौशल गिरी आदि मौजूद रहे।