रेहड़ी पर केले बेचने वाले एक व्यक्ति ने ईमानदारी की मिसाल पेश करते हुए कई घंटे बाद लौटी महिला को उसका पांच हजार रुपये से भरा पर्स लौटा दिया। खुश होकर जब महिला ने इनाम देने लगी तो उसने उसे लेने से इनकार कर दिया। घटना शनिवार दोपहर की है।
बाल विकास विभाग में सुपरवाइजर सुधा त्रिपाठी ने गुरुकुल कांगड़ी विवि के गेट-छह पर खड़े रेहड़ी वाले से केले खरीदे। इसे लेने के लिए उन्होंने रेहड़ी पर रखकर पर्स खोला। बाद में केले तो उठा लिए लेकिन पर्स वहीं भूल गई। महिला को शाम को दोबारा पर्स की जरूरत पड़ी तो पता चला कि वह घर में है ही नहीं।
इसके बाद याद आया कि पर्स तो रेहड़ी पर भूूल गई है। सुधा त्रिपाठी गुरुकुुल के गेट छह पर पहुंची तो वहां केले वाला नहीं था। पता चला कि पास ही जगजीतपुर की पुलिया पर पीठ लगी है। सुधा उसे तलाशती वहां पहुंची तो केलेवाला मिल गया। सुधा के मुताबिक केलेवाले ने उनका पर्स पॉलीथिन मेें लपेटकर रखा था।
उसने पर्स लौटाते हुए कहा कि आप इसको खोलकर देख लीजिए। आपका सामान पूरा है या नहीं। उसने यह भी कहा कि आप पर्स लेने नहीं आती तो मैं आपको तलाशकर पर्स लौटाता। सोमवार को फिर गेट नंबर छह पर जाता और वहां किसी से पूछता।
केलेवाले की ईमानदारी से खुश हुई सुधा ने उसे इनाम स्वरूप 200 रुपये देने चाहे लेकिन उसे लेने से मना कर दिया। उसने कहा कि यह पर्स आपका था, मैंने आपको लौटा दिया। इसमें किसी इनाम की जरूरत नहीं है। सुधा का कहना है कि वह जल्दबाजी में उसका नाम तक नहीं पूछ पाई।