राज्य सरकार ने चंडीघाट पुल से लक्सर के ग्राम कलसिया तक 50 किलोमीटर परिधि को बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के चिह्नित किया है। इस क्षेत्र में भूमि के उपयोग पर प्रतिबंध लगा दिया है।
ग्राम गाजीवाला और ग्राम कांगड़ी के ग्रामीणों ने बृहस्पतिवार को सिंचाई खंड हरिद्वार के कार्यालय पहुंच कर विरोध प्रकट किया है। उनका कहना था कि 1919 में गंगा नदी प्राचीन गुरुकुल कांगड़ी के पश्चिम में बहती थी। जिसकी दूरी ग्राम गाजीवाली व कांगड़ी से लगभग 3 किलोमीटर दूर थी। वर्तमान गंगा नदी उनके गांव व खेतों से सट कर बह रही है। सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता को ज्ञापन देने आए ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि गंगा नदी का केंद्र बिंदु जाने बिना ही वर्तमान में बह रही गंगा नदी से बाढ़ प्रभावित क्षेत्र घोषित कर दिया गया है। इस अधिसूचना से उनकी पूरी भूमि और घर भी चपेट में आ गए हैं। जिससे सभी लोग परेशान हैं। उनमें इस बात को लेकर रोष है कि शासन ने उनके हितों को अनदेखा कर बाढ़ मैदान क्षेत्र को चिह्नित कर उपयोग के लिए प्रतिबंधित कर दिया है। उन्होंने अधिसूचना को वापस लेकर पहले यह निर्धारित करने की मांग की है कि गंगा नदी का वास्तविक बिंदु कहां पर है। ज्ञापन देने वालों में प्रधान महेश कुमार, पूर्व प्रधान होरी सिंह, हरिश्चंद्र डुगरियाल, राजेंद्र जोशी, चंडी प्रसाद पंत, राघवानंद शर्मा, ललित ढौढियाल, विजय पाल, सतपाल आदि थे।
निर्माण कराना होगा कठिन
उत्तराखंड शासन के प्रमुुख सचिव आनंद बर्द्धन द्वारा 28 फरवरी को जारी सरकारी अधिसूचना में बाढ़ मैदान क्षेत्र को चिह्नित कर चंडीघाट पुल से ग्राम कलसिया लक्सर तक 50 किलोमीटर की परिधि में भूमि के उपयोग के साथ निर्माण पर भी रोक लगा दी गई है। निर्बन्धित क्षेत्र में पार्क, खेल का मैदान, मत्स्य पालन व कृषि आदि गतिविधियों तथा समय-समय पर होने वाले धार्मिक मेलों के लिए अस्थायी निर्माण इस प्रतिबंध के साथ अनुमन्य होंगे कि उनसे उत्सर्जित होने वाला जल-मल व ठोस अपशिष्ठ का पूर्णत: समुचित प्रबंधन सुनिश्चित किया जाएगा। अधिसूचित क्षेत्र में पूर्व से विद्यमान निर्माण, जो जीर्ण-शीर्ण अवस्था में हैं उनको अधिकतम ऊंचाई 7.50 मीटर और दो मंजिल की सीमा तक पुनर्निर्माण की अनुमति क्षेत्र में सीवरेज व्यवस्था उपलब्ध होने की स्थिति में ही दी जा सकेगी।