जनपद में शिक्षकों के अटैचमेंट और फर्जीवाड़े सहित कई अहम मुद्दों का लेकर देहरादून निदेशालय में बुलाई गई बैठक में विभाग को लापरवाही पर फटकार मिली। अटैचमेंट का खेल खत्म करने के लिए विभाग को एक हफ्ते की मोहलत दी गई है। फर्जीवाड़े में फंसे शिक्षकों की विजिलेंस जांच में सहयोग देने के साथ ही नए शिक्षकों के दस्तावेजों की पड़ताल के निर्देश भी दिए गए हैं।
जनपद का शिक्षा विभाग शिक्षकों के अटैचमेंट का खेल रोकने में नाकाम रहा है। फर्जीवाड़े में बर्खास्त शिक्षकों से रिकवरी और उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने में भी विभाग का रवैया उदासीन रहा। शासन ने दोनों मुद्दों सहित कई अहम मसलों को लेकर बैठक बुलाई थी। विभाग से अटैचमेंट और फर्जीवाड़ा प्रकरण में दस्तावेजों सहित पूरा आंकड़ा मांगा गया था। सूत्र बताते हैं कि बैठक में इन दोनों ही प्रकरणों में विभाग के अधिकारी माकूल जवाब नहीं दे पाए। शासन ने अब तक अटैचमेंट के सहारे मनमाफिक स्कूलों और दफ्तरों में जमे शिक्षकों को एक सप्ताह में उनके मूल तैनाती स्थल पर भेजने के निर्देश दिए। फर्जीवाड़ा प्रकरण में विजिलेंस की जांच शुरू होने पर विभाग को सहयोग देने और नए भर्ती होने वाले शिक्षकों के दस्तावेजों को भी परखने की हिदायत दी गई। उत्तराखंड प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष अशोक चौहान से जुड़े प्रकरण पर भी दिशा निर्देश दिए गए हैं।
लालढांग प्रकरण में गुमराह किया तो खुली पोल
बैठक में लालढांग प्रकरण पर भी चर्चा हुई। अपर निदेशक महावीर सिंह बिष्ट की जांच के बाद प्रधानाध्यापक और शिक्षिका को स्कूल से हटाने क निर्देश दिए जा चुके हैं। बावजूद इसके एक पखवाड़ा बीतने के बाद भी उन्हें नहीं हटाया गया। पूछने पर अधिकारियों का कहना था कि फाइल अनुमोदन के लिए प्रभारी मुख्य शिक्षा अधिकारी को भेजी गई है। जब प्रभारी सीईओ डा. पुष्पा रानी वर्मा को फोन किया गया तो उन्होंने फाइल आने से ही मना कर दिया। इस पर तत्काल फाइल को ले जाकर दोनों शिक्षक शिक्षिका को हटाने के सख्त निर्देश दिए गए।
जो शिक्षक अटैचमेंट पर दूसरे स्कूलों या दफ्तरों में तैनात हैं, उन्हें मूल तैनाती स्थल पर भेजने के लिए एक सप्ताह का समय दिया गया है। फर्जीवाड़ा प्रकरण में भी जरूरी निर्देश जारी किए गए हैं।- महावीर सिंह बिष्ट, अपर निदेशक प्राइमरी शिक्षा उत्तराखंड