हरिद्वार। आतंकी संगठन गड़बड़ी फैलाने के लिए अपने मंसूबों को अंजाम देने के लिए भले ही नाकाम कोशिश कर रहे हों प्रयासरत हों लेकिन मेला प्रशासन श्रद्धालुओं के स्वागत और सुरक्षा के लिए तैयार है। पहले भी कई बार इस तरह के प्रयास किए गए लेकिन पुलिस और अर्द्घसैनिक बलों ने सारी साजिश को नाकाम कर किया। सौहार्द की प्रतीक धर्मनगरी हरिद्वार इस बार भी श्रद्धालुओं के स्वागत के लिए पूरी तरह तैयार है। यहां किसी प्रकार का खतरा नहीं है। मेला प्रशासन ने सभी व्यवस्थाएं चाक चौबंद कर रखी हैं।
अर्द्धकुंभ मेला राज्य सरकार की प्राथमिकता में है। श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए चप्पे-चप्पे पर पुलिस तथा अर्द्घसैनिक बल के जवान आधुनिक उपकरणों व हथियारों के साथ मुस्तैद हैं। देवभूमि का इतिहास सौहार्द एवं सद्भाव का साक्षी है। स्नान और मेलों के दौरान यहां कभी कोई आतंकी घटना नहीं हुई। प्राकृतिक दुर्घटनाओं के सिवाय कभी ऐसी अप्रिय व सुरक्षा के लिए चिंता करने की जरूरत नहीं पड़ी। प्रतिवर्ष चारधाम की यात्रा में लाखों की संख्या में श्रद्धालु आते हैं। धर्मनगरी हरिद्वार में कुंभ-अर्द्घकुंभ का आयोजन तो 12 व 6 साल में होता है, परंतु धर्मनगरी में प्रतिवर्ष लक्खी मेलों, स्नान पर्वों पर लाखों श्रद्घालु पवित्र गंगा स्नान करने आते हैं। साल में दो शारदीय एवं श्रावण मास की कांवड़ यात्रा होती है जिससे प्रतिवर्ष कांवड़ियों की संख्या पिछला रिकार्ड तोड़ते हुए आगे बढ़ती है। अर्द्घकुंभ मेला 1992 के समय पंजाब में आतंकवाद छाया हुआ था। तब कुछ डरावना माहौल था परंतु कोई परिंदा भी पर नहीं मार सका था। यद्यपि कुंभ समाप्त होने के बाद बहादराबाद के पास रोडवेज की बस में आतंकवाद की दुस्साहसिक घटना अवश्य हुई। पुलिस प्रशासन की ओर से भी श्रद्घालुओं की सुरक्षा की व्यापक व्यवस्था की गई है। मेलाधिकारी एसए मुरुगेशन का कहना है को श्रद्धालुओं को बेधड़क आना चाहिए, उनकी यात्रा को पूरी तरह सुरक्षित बनाने की व्यवस्था की गई है।
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बोले आईजी अर्द्घकुंभ
मेला प्रभारी आईजी जीएस मर्तोलिया का कहना है कि यह अच्छी बात है कि कहीं भी लावारिस सामान दिखने पर लोग पुलिस को सूचना दे रहे हैं। इसका सीधा मतलब है कि सुरक्षा के प्रति लोग सचेत हैं और पुलिस के साथ संवाद स्थापित कर रहे हैं। मेला क्षेत्र में सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम हैं। श्रद्घालु निश्चिंत होकर आएं। उनकी पूरी सुरक्षा के लिए पुलिस कृतसंकल्प है।