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आधार के बिना भी जरूरतमंद को मिलेगा राशन!

Mon, 10 Apr 2017 10:49 PM IST
मेहताब आलम हरिद्वार
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राशन कार्ड के लिए आधार देने से ऐसे लोगों को राहत मिल सकती है, जो व्यवहारिक और तकनीकी समस्या की वजह से आधार कार्ड नहीं बनवा पा रहे हैं। आधार के बिना राशन कार्ड ऑनलाइन न होने से जनपद के लगभग पांच हजार परिवारों के राशन को लेकर संशय बना हुआ है। विभाग ने कुष्ठ रोगियों और वयोवृद्ध कार्ड धारकों के संबंध में शासन को चिट्ठी भेजकर गाइड लाइन मांगी है।       

सार्वजनिक वितरण प्रणाली में पारदर्शिता लाने के लिए राशन कार्डों को आधार से जोड़ा जा रहा है। आधार से लिंक होने पर राशन कार्ड ऑनलाइन करने की योजना है। जिसके बाद बायोमैट्रिक मशीन पर अंगूठा लगाकर राशन दिया जाएगा। इसके लिए परिवार के मुखिया के साथ-साथ राशन कार्ड में दर्ज सभी सदस्यों के आधार अनिवार्य किए गए हैं। आधार जमा न होने पर राशन न मिलने की चेतावनी भी लगातार दी जा रही है। जनपद में 4.44 लाख राशन कार्ड हैं। इनमें 20 लाख यूनिट के तौर पर हर सदस्य का आधार जमा करने की प्रक्रिया चल रही है। अब तक 88 प्रतिशत आधार जमा किए जा चुके हैं। राशन कार्ड धारकों और उनके परिवार के सदस्यों की एक बड़ी संख्या ऐसी भी है, जो चाहकर भी आधार कार्ड नहीं बनवा पा रहे हैं। चूंकि आधार बनवाने के लिए दोनों हाथों के अंगुलियां व अंगूठों के अलावा आंखों की पुतलियों के नमूने भी लिए जाते हैं। जिले में बड़ी संख्या में कुष्ठ रोगी ऐसे हैं, जिनके हाथ के अंगूठे व अंगुलियां बीमारी के कारण खत्म हो चुके हैं, व्यवहारिक कठिनाई के चलते उनका आधार बनना असंभव है। वहीं 80 साल व उससे ज्यादा उम्र वाले बुजुर्गों की आंखों की पुतलियां भी वेबकैम आबर्जव नहीं कर पा रहा है। तकनीकी कारणों से ऐसे उम्रदराज लोगों के आधार भी नहीं बन पा रहे हैं।    
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इनके अलावा ईंट भट्टों पर काम करने वाले मजदूर परिवारों के हाथों की अंगुलियों व अंगूठों के निशान मिटने के कारण भी आधार बनने में दिक्कत आ रही है। खास बात यह है कि सरकारी सस्ते राशन के वास्तविक पात्र भी ऐसे ही परिवार हैं। जिले में ऐसे परिवारों की संख्या पांच हजार के पार है। विभाग के सामने लगातार यह समस्या आ रही है, ऐसे में शासन को पत्र भेजकर गाइड लाइन मांगी गई है।  जिला पूर्ति अधिकारी राहुल शर्मा का कहना है कि जायज समस्या होने से ऐसे परिवारों को राहत मिल सकती है। शासन चाहे तो इन परिवारों के लिए फिलहाल की तरह मैन्यूअल तरीके से राशन देने की छूट दे सकता है।      
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बार- बार नियम बदलने से हो रही परेशानी      
राशन कार्डों को आधार से लिंक करने का काम कई साल से जारी है। बार- बार नियम बदलने और आबादी के लिहाज से प्रदेश का सबसे बड़ा जनपद होने से लक्ष्य पूरा करने में देर हो रही है। पहले सिर्फ राशन कार्ड धारक मुखिया का ही आधार जमा होना था। बाद में राशन कार्ड में दर्ज सभी सदस्यों के आधार अनिवार्य कर दिए गए। जिससे राशन डीलरों को भी आधार जुटाने में पसीना बहाना पड़ रहा है, साथ ही उपभोक्ताओं को भी बार बार आधार जमा करने की दिक्कत उठानी पड़ रही है।       
    
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