मोबाइल में इंटरनेट रिचार्ज कराने से पहले एक बार दूरसंचार कंपनियों के नेट रिचार्ज ऑफर पर नजरें दौड़ा लें। कई कंपनियों ने इनके दामों में चुपके से बढ़ोतरी कर जनता की जेब काटनी शुरू कर दी है। कई नए रिचार्ज लांच कर दिए गए तो पुराने मूल्य के कई रिचार्ज में दिन और डाटा घटा दिया गया।
15 जून से दूरसंचार कंपनियों ने एक जीबी इंटरनेट रिचार्ज के दाम में 45 रुपये से अधिक की बढ़ोतरी की है। कंपनियों ने उपभोक्ताओं की जेब से ज्यादा पैसा निकालने का एक दूसरा रास्ता भी निकाला है। पुराने मूल्य के रिचार्ज ज्यों के त्यों रखे गए लेकिन उनकी वेलिडिटी और उनसे मिलने वाला डाटा घटा दिया गया है।
ऐसे में मोबाइल उपभोक्ताओं को पता ही नहीं चल पाया कि कब नेट रिचार्ज के दाम बढ़ा दिए।
कितने हुए दाम
एयरटेल कंपनी ने पहले 249 रुपये में 28 दिन तक थ्रीजी स्पीड में एक जीबी इंटरनेट डाटा की सुविधा दी थी। जबकि अब एक जीबी थ्रीजी इंटरनेट का दाम 50 रुपये बढ़ाकर 299 रुपये में 28 दिन कर दिया है। वहीं आइडिया कंपनी ने भी एक जीबी इंटरनेट रिचार्ज के दाम 249 रुपये से 48 रुपये बढ़ाकर 297 रुपये कर दिया है। इसी तरह वोडाफोन ने एक जीबी थ्रीजी इंटरनेट डाटा का रिचार्ज कूपन 248 रुपये से 49 रुपये बढ़ाकर 297 रुपये कर दिया है।
दूसरों पर नजर
दूरसंचार कंपनियों ने एकाएक नेट रिचार्ज के दामों में बढ़ोतरी का सिलसिला शुरू किया है। जिन कंपनियों ने फिलहाल अपने नेट रिचार्ज दामों में बढ़ोतरी नहीं की है वे अपनी प्रतिद्वंद्वी कंपनियों पर नजर जमाए हुए हैं। जिससे इस तरह से दाम बढ़े कि ग्राहकों को कंपनी की ओर से आकर्षित किया जा सके।
कंपनी की मर्जी
इस बारे में आइडिया के एरिया सेल्स मैनेजर जितेंद्र सिंह राणा ने बताया कि दामों में बढ़ोतरी कंपनी की ओर से तय की जाती है। इस बारे में हम कुछ नहीं कह सकते। एयरटेल के जोनल सेल्स मैनेजर कुणाल कक्कड़ का कहना है कि रेट बढ़ाए जाने की बाबत कोई जानकारी नहीं है। यह कंपनी स्तर का निर्णय है।
धोखे से बचे
नेट के रेट बढ़ने से अंजान ग्राहक पुराने रेट 249 रुपये पर एक जीबी इंटरनेट डाटा के लिए नेट रिचार्ज करा रहे हैं। इस पर अब सिर्फ 750 मेगा बाइट्स ही ग्राहक को प्राप्त हो रही है। ऐसे में ग्राहक मोबाइल में इंटरनेट रिचार्ज कराने से पहले उस कीमत के रिचार्ज में मिलने वाले नेट डाटा की जानकारी कर लें। मोबाइल रिचार्ज करने वाले दुकानदार ने बताया कि कंपनियां की तरफ से रिचार्ज के दाम बढ़ने पर पूरी जानकारी नहीं दी जाती है।
फिर सीधे कटता है बैलेंस
मोबाइल पर इंटरनेट उपयोग के दौरान एमबी खत्म होने के तुरंत बाद मुख्य बैलेंस में से कटौती शुरू हो जाती है। इसका पता ग्राहक को कभी-कभी तब पता चलता है जब उनके मोबाइल में बैलेंस शून्य हो जाता है। इस पर उपभोक्ता कई बार अपनी नाराजगी जता चुके हैं।