अंतरराष्ट्रीय बॉयोअकास्टिक्स काउंसिल लंदन की ओर से ब्रिटेन के ब्राइटन शहर में होने वाले अंतरराष्ट्रीय महासम्मेलन में गुरुकुल कांगड़ी विवि के पक्षी वैज्ञानिक प्रो. दिनेश भट्ट एशिया का प्रतिनिधित्व करेंगे। यह सम्मेलन सितंबर के प्रथम सप्ताह में आयोजित होगा।
गुुरुकुल विवि के जंतु एवं पर्यावरण विज्ञान के अध्यक्ष और कुलसचिव प्रो. दिनेश भट्ट को इस महासम्मलेन की एक संगोष्ठी की अध्यक्षता करने का मौका भी दिया गया है। प्रो. भट्ट पक्षियों के गीतों की भौगोलिक एवं सांस्कृतिक विविधता विषय की अध्यक्षता करेंगे। प्रो. भट्ट ने बताया कि जीन ही नहीं संस्कृति एवं भू भौगोलिक परिस्थिति का भी पक्षी गीतों की संरचना एवं गायन कला पर सीधा एवं गहरा प्रभाव पड़ता है। पक्षियों के लिए संस्कृति शब्द की व्याख्या करते हुए प्रो. भट्ट ने बताया कि जिस प्रकार मनुष्य जाति का अलग-अलग भू भागों में रहने के कारण उनकी भाषा, बोली तथा लहजे में अंतर दिखता है, उसी प्रकार अलग-अलग भू भागों, द्वीप, प्रायद्वीप, महाद्वीप में रहने वाले समान प्रजाति के पक्षी के विभिन्न सदस्यों के गीतों में भी अंतर दिखाई देता है। पक्षियों में गीतों के विकास पर चर्चा करते हुए प्रो. भट्ट ने बताया कि जहां मानव जाति में बच्चों को ठीक से सीखने एवं बोलने में वर्षों लग जाते हैं, वहीं पक्षियों में रियाज की ये अवधि केवल कुछ महीनों की ही होती है। प्रो. भट्ट के अनुसार प्रत्येक नर पक्षी को अपने प्रथम वर्ष के प्रजनन काल से पहले गीतों को गाने का सही अंदाज एवं व्याकरण सीखनी पड़ती है तथा उनका प्रयोग मादा को रिझाने तथा क्षेत्र रक्षण में करना होता है। यदि नर पक्षी ठीक से गाना नहीं सीख पाता है तो वह प्रजनन में असफल रहता है। प्रो. भट्ट को अभी तक 15 देशों में अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलनों में उनके शोध कार्यों को प्रस्तुत करने हेतु आमंत्रित किया जा चुका है।