हरिद्वार। शहर में करोड़ों रुपये की लागत से तैयार किए गए मदर एंड चाइल्ड हॉस्पिटल को भी पीपीपी मोड पर दिया जा सकता है। शासन स्तर पर इसकी प्रक्रिया चल रही है। इससे राजकीय मेडिकल कॉलेज की तरह मदर एंड हॉस्पिटल को भी पीपीपी मोड पर चलाए जाने की संभावना बढ़ गई है।
सरकार की ओर से लगभग 38 करोड़ रुपये की लागत से जिले का सबसे बड़ा मदर एंड चाइल्ड हॉस्पिटल की बिल्डिंग एक साल पहले बनाकर खड़ी कर दी गई थी। दो सौ बेड का ये अस्पताल जिले का सबसे बड़ा होगा। यही नहीं जिला अस्पताल, महिला अस्पताल और मदर एंड चाइल्ड हॉस्पिटल तीनों एक हो जाने से 270 का नया अस्पताल अस्तित्व में आ जाएगा। अस्पताल में आधुनिक सुविधाएं मरीजों, महिलाओं, बच्चों के लिए दी जाएंगी।
जिलाधिकारी कर्मेंद्र सिंह की ओर से जिला अस्पताल की पुरानी बिल्डिंग को तोड़कर नए भवन बनने तक करीब एक से डेढ़ साल तक मदर एंड हॉस्पिटल को चलाए जाने के लिए प्रस्ताव शासन को भेजकर अनुमति मांगी गई है, लेकिन बताया जा रहा है कि हॉस्पिटल को राजकीय मेडिकल कॉलेज हरिद्वार की तर्ज पर पीपीपी मोड पर भी संचालित करने के लिए तैयारी चल रही है। अगर ऐसा होता है तो धर्मनगरी की दो बड़ी स्वास्थ्य सेवाएं पीपीपी मोड पर चली जाएंगी।
जो भी आदेश शासन की ओर से मिलेंगे, उन्हीं पर भवन का उपयोग किया जाएगा। हालांकि, जिला प्रशासन ने तो हॉस्पिटल के भवन को फिलहाल जिला अस्पताल के प्रयोग में लाने के लिए प्रस्ताव भेजा गया है, ताकि मरीजों को जिला अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिलता रहे।
डाॅ. आरके सिंह, मुख्य चिकित्साधिकारी, हरिद्वार