मुख्यमंत्री हरीश रावत ने बुधवार को गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय में शहीद-ए-आजम भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु की फांसी से पहले हुए केस ट्रायल के डिजिटल संस्करण का लोकार्पण किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि यह ऐतिहासिक क्षण है। ट्रायल के दस्तावेज देश की धरोहर है। उन्होंने पाकिस्तान से ट्रायल लाने और उसका हिंदी में अनुवाद करवाने के बाद डिजिटलाइजेशन करने पर गुरुकुल कांगड़ी विवि प्रशासन को बधाई दी।
गुरुकुल कांगड़ी विवि में मुख्यमंत्री हरीश रावत ने बटन दबाकर ट्रायल के डिजिटल संस्करण का लोकार्पण किया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि गुरुकुल सिर्फ एक विश्वविद्यालय ही नहीं है, बल्कि उत्तराखंड की पहचान है। जिन महापुरुषों ने देश आजाद कराने के लिए अपनी जवानी न्यौछावर की, विश्वविद्यालय न सिर्फ उनकी फांसी का ट्रायल लेकर आया, बल्कि उसे डिजिटल रूप में संरक्षित करने का सराहनीय काम भी किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि वह शहीदों के कोर्ट ट्रायल का लोकार्पण करते हुए खुद को गौरवशाली महसूस कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह उत्तराखंड के लिए भी गर्व की बात है कि शहीदों की फांसी का ट्रायल यहां मौजूद है। मुख्यमंत्री ने पाकिस्तान से ट्रायल लाने और उसका उर्दू से हिंदी अनुवाद करने वाले लक्ष्मण शर्मा को शॉल और गुलदस्ता भेंट कर सम्मानित किया। सहयोग करने पर विवि के कुलपति डा. सुरेंद्र कुमार सहित दिल्ली विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष योगानंद शास्त्री व एम्स के प्रशासनिक अधिकारी शशिकांत को भी सम्मानित किया। कार्यक्रम संयोजक डा. प्रभात कुमार ने ट्रायल की जानकारी दी।
कुलसचिव प्रो. विनोद कुमार, इतिहास विभागाध्यक्ष डा. देवेंद्र कुमार गुप्ता, डा. रूपकिशोर शास्त्री आदि ने भी इस दौरान विचार रखे। कार्यक्रम में डा. अजय मलिक, डा. आरकेएस डागर, डा. दीपक घोष, करतार सिंह, पिरान कलियर मदरसा गुलजार-ए-फरीद के मौलाना सैयद आदि लोग इस दौरान मौजूद रहे।