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19 का होने जा रहा प्रदेश, गरीब आज भी गरीब : उपाध्याय

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पत्रकारों से वार्ता करते वनाधिकार आंदोलन के प्रदेश संयोजक किशोर उपाध्याय साथ में पदाधिकारी । - फोटो : HARIDWAR
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कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष व वनाधिकार आंदोलन के प्रदेश संयोजक किशोर उपाध्याय ने कहा कि 9 नवंबर को प्रदेश 19 साल का हो जाएगा। इन सालों में प्रदेश में केवल कुछ नेताओं, अधिकारियों व विभिन्न तंत्रों से जुड़े कुछ लोगों ने तरक्की की है। गरीब आज भी अपने हक के लिए तरस रहा है। पलायन नहीं रुक सका। अब सबसे गंभीर मामला प्रदेश को नशे के गर्त में धकेलने के लिए काम शुरू कर दिया है।
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सोमवार को रानीपुर मोड़ पर एक होटल में प्रेसवार्ता करते हुए किशोर उपाध्याय ने बताया कि वनाधिकार आंदोलन के तहत आगामी 2 नवंबर को स्वर्गीय इंद्रमणि बडोनी के गांव से राज्य आंदोलनकारियों के सपनों को धार देंगे। ये आंदोलन पिथौरागढ़ तक चलेगा। उन्होंने आंदोलन के प्रमुख बिंदुओं की जानकारी देते हुए बताया कि प्रदेश को वनवासी प्रदेश घोषित कर उत्तराखंडियों को केंद्र सरकार की नौकरियों में आरक्षण दिया जाए। जब दिल्ली की सरकार उत्तराखंड के पानी को फ्री में दे सकती है तो प्रदेश सरकार को भी जनता को निशुल्क पानी दिया जाना चाहिए। बताया कि सारे ईंधन के कार्य जंगल से ही पूरे होते थे, इसलिए एक गैस सिलिंडर हर महीने निशुल्क मिलना हमारा हक है। युवाओं के रोजगार के लिए उत्तराखंड में उगने वाली जड़ी बूटियों के दोहन का अधिकार स्थानीय समुदाय को दिया जाए। यदि कोई जंगली जानवर किसी व्यक्ति को विकलांग कर देता है या मार देता है तो सरकार को 25 लाख रुपये का मुआवजा व पक्की सरकारी नौकरी देनी चाहिए। वन अधिकार अधिनियम-2006 को उत्तराखंड में लागू किया जाए और उत्तराखंड को प्रति वर्ष 10 हजार करोड़ ग्रीन बोनस दिया जाए। तिलाड़ी कांड के शहीदों के सम्मान में 30 मई को वन अधिकार दिवस घोषित किया जाए। उन्होंने कहा कि वनाधिकार आंदोलन के कार्यकर्ता 2 से 9 नवंबर तक पदयात्रा निकलेंगे। इस अवसर पर अंशुल श्री कुंज, सुमित तिवारी, विभाष मिश्रा, ओपी चौहान, अशोक उपाध्याय, नमन अग्रवाल, दीपक टंडन, घनश्याम कुमार आदि उपस्थित थे।
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