विधानसभा चुनाव परिणाम ने हर किसी को चौंका दिया। जिले की विधानसभा सीटों पर कयास लगा रहे राजनीतिक पंडित भी हतप्रभ हैं। राजनीतिक पंडितों का सारा गणित गड़बड़ा गया और कयास धरे के धरे रह गए। खासतौर पर मुख्यमंत्री हरीश रावत की हार सबसे चौंकाने वाली रही है।
प्रदेश के मुख्यमंत्री हरीश रावत के हरिद्वार ग्रामीण विधानसभा सीट से बतौर उम्मीदवार उतरने के बाद जिले में नेतृत्वविहीन दिख रही कांग्रेस में जान फूंक दी थी। कयास थे कि कांग्रेस जिले में पिछले विधानसभा चुनाव परिणाम के मुकाबले बढ़त बनाएंगी। कम से कम चार से छह सीट कांग्रेस की झोली में आने के दावे किए जा रहे थे। जिले में सूपड़ा साफ कर देने वाली भाजपा की दो से तीन सीट तय मानी जा रही थी और बसपा की जीत दो या तीन सीट पर आंकी गई थी। पर, पूरा परिणाम बिलकुल ही उलटा हुआ। कांग्रेस को जितनी सीटें मिलने की उम्मीद थी उससे अधिक सीट भाजपा की झोली में आई। कांग्रेस तो धूल चाट ही गई लेकिन बसपा तो आंधी के साथ ही उड़ गई। सीएम हरीश रावत भी हार जाएंगे ये किसी ने दूर- दूर तक सोचा नहीं था। शनिवार को जैसे- जैसे चुनाव परिणाम आते रहे वैसे- वैसे राजनीतिक पंडितों के चेहरे से भी रंग उड़ता रहा। हर कोई अपने गणित के गड़बड़ाने पर हैरान दिखाई दिया।