हरिद्वार। भारत माता मंदिर के अध्यक्ष स्वामी सत्यमित्रानंद गिरी ने कहा कि महापुरुषों को जीवन निर्मल जल के समान है। संत वही है जो परोपकार को समर्पित हो।
चेतन ज्योति आश्रम में भागवत कथा स्थल पर आयोजित संत सम्मेलन को संबोधित करते हुए सत्यमित्रनंद ने संतों की महिमा बताई। उन्होंने कहा कि प्राचीन काल से संत इस संसार को ज्ञान बांटते आए हैं। वर्तमान युग में यह दायित्व और बढ़ गया है। आचार्य प्रमोद कृष्णनम ने कहा कि जब भी पृथ्वी पर समस्याएं उत्पन्न हुई हैं, तभी संतों दे आगे आकर मार्ग प्रशस्त किया है। मुनि चिदानंद ने कहा के प्रभु आराधना में व्याप्त शक्ति को यदि जिसने पहचान लिया, वह भवसागर से पार हो गया। ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी ने कहा कि संत अपने लिए नहीं, अपितु जगत के लिए जीते हैं। उनके द्वारा दिखाया गया रास्ता सच्चा रास्ता होता है।
संत सम्मेलन में जगन्नाथ मंदिर के अध्यक्ष दिलीप दास, स्वामी पुरुषोत्तम दास, डा. श्याम सुंदर दास शास्त्री, स्वामी हरिचेतनानंद, महामंडलेश्वर अर्जुन पुरी, बाबा हठ योगी दिगंबर, स्वामी ऋश्विरानंद आदि ने भी विचार रखे। भागवत कथा के यज्ञमान चंदू भाई प्रजापति के साथ कथा श्रवण के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बड़े भाई पंकज मोदी भी श्रोताओं में उपस्थित रहे।