बड़े नोटों पर पाबंदी से फजीहत के बीच सिडकुल की एक फैक्ट्री में सेलरी के तौर पर कर्मचारियों को पुराने नोट थमा दिए गए। विरोध करने पर कर्मचारियों को काम से निकालने की धमकी भी दी गई। इस पर कर्मचारियों का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने रैली निकालकर प्रदर्शन करते हुए सहायक श्रमायुक्त कार्यालय के बाहर धरना दिया। समस्याओं को लेकर ज्ञापन भी सौंपा।
एक हजार और पांच सौ रुपये के नोट बंद होने से हर वर्ग की तरह उद्योग जगत भी सकते में हैं। सबसे बड़ी परेशानी यह है कि पहले से जमा पुराने नोटों का कैसे इस्तेमाल किया जाए। इसके लिए तरह तरह की फंडे निकाले भी जा रहे हैं। बृहस्पतिवार को सिडकुल की एक फैक्ट्री में कर्मचारियों के हाथ में पुराने नोट थमा दिए गए। बैंकों के बाहर लगी लंबी लंबी कतारें देख रहे कर्मचारियों ने पुराने नोट लेने से इनकार कर दिया। आरोप है कि इसके बाद उन्हेें काम से हाथ धोने की धमकी भी दी गई। लामबंद हुए कर्मचारी नारेबाजी करते हुए रैली के रूप में सहायक श्रमायुक्त कार्यालय पहुंचे और धरना देकर बैठ गए। सहायक श्रमायुक्त के जानकारी लेने पर उन्होंने समस्याओं और मांग के संबंध में लिखित ज्ञापन भी दिया। प्रदर्शन करने वालों में मनोज, मोनू, नवीन, प्रवीन, लोकेंद्र, अमित, नजराना, गजाला, आसिफ, अजय, सलमान, अर्जुन आदि शामिल रहे। सहायक श्रमायुक्त ने कर्मचारियों को सकारात्मक कार्यवाही का भरोसा दिलाया।
आधा महीना बीता, अब मिल रही सेलरी
कर्मचारियों को बंद हो चुके पुराने नोट बांटने से ही सवाल नहीं उठते बल्कि बड़ा सवाल यह है कि आधा महीना गुजरने के बाद उन्हें सेलरी दी जा रही है। कर्मचारियों का उत्पीड़न और शोषण श्रम विभाग और जिला प्रशासन की नाक के नीचे हो रहा है। यह हाल तब है जबकि श्रमिक संगठनों की अच्छी खासी संख्या भी हरिद्वार में खुद को सक्रिय बताती है।