मुख्यमंत्री हरीश रावत की ओर से जनसमस्याओं को सुनने के लिए क्षेत्र के तांसीपुर और सिकंदरपुर गांवों में जनता दरबारों का आयोजन मंगलवार को था। दिनभर फरियादी उनके इंतजार में आयोजन स्थलों के चक्कर काटते रहे।
जनता दरबार के लिए लगाए गए टेंट और शामियाने में अधिकारी और कांग्रेस पदाधिकारी भी रास्ता ताकते रहे, लेकिन ऐन वक्त पर मुख्यमंत्री का कार्यक्रम रद्द होने के कारण सभी को निराश लौटना पड़ा। उम्मीदें लेकर और रोजमर्रा के काम छोड़कर समस्याओं के समाधान व क्षेत्र के विकास के लिए बड़ी-बड़ी उम्मीदें लेकर अपने रोजमर्रा के काम छोड़कर पहुंचे ग्रामीणों को दिनभर धूप में इंतजार कर वापस लौटना पड़ा।
मंगलवार को मुख्यमंत्री हरीश रावत ने रुड़की तहसील क्षेत्र के गांव तांशीपुर और भगवानपुर तहसील क्षेत्र के सिकंदरपुर गांव में जनता दरबार प्रस्तावित थे। इन जनता दरबारों में मुख्यमंत्री हरीश रावत को लोगों की मूलभूत समस्याओं को सुनकर उनका समाधान करना था।
प्रशासन ने मुख्यमंत्री के जनता दरबार के लिए तमाम तैयारियां कर ली थीं। दूर-दराज से ग्रामीण भी अपनी समस्याओं के हल के लिए पहुंच गए थे, किसी को मुख्यमंत्री के सामने मुआवजा नहीं मिलने की शिकायत करने थी तो किसी को इंटर कालेज और क्षतिग्रस्त सड़क बनवानी थी, लेकिन मुख्यमंत्री नहीं आए।