महीने भर से मतदाताओं का ख्याल रख रहे प्रत्याशियों की कृपा मतदान के ऐन वक्त पर गृहणियों पर जमकर बरसी। किसी ने साड़ी बांटकर तो किसी ने प्रेशर कुकर देकर वोट देने की कसम खिलाई। समर्थकों की टीमें आधी रात तक वोटरों के दर्शन कर उनकी सेवा करने में जुटी रही। देखने वाली बात यह है कि प्रत्याशी चुनावी कुकर में कितने वोट पकाने में कामयाब हो पाते हैं।
प्रत्याशियों ने नामांकन से पहले ही मतदाताओं को रिझाने के प्रयास शुरू कर दिए थे। नामांकन के बाद जैसे-जैसे प्रचार जोर पकड़ता गया, वैसे-वैसे शराब की खपत बढ़ती गई। पुलिस ने जितने बड़े पैमाने पर चुनाव में अवैध शराब पकड़ी, इससे साफ पता चलता है कि इस बार भी चुनाव में शराब की नदियां बहाई गई हैं। बहरहाल अभी तक प्रत्याशी पुरुष मतदाताओं की लामबंदी में ही जुटे रहे। मतदान से दो दिन पहले प्रत्याशियों को गृहणियों की याद आई। गृहणियों को भावनात्मक रूप से अपने पक्ष में करने के लिए प्रत्याशियों ने तोहफे के तौर पर उनकी जरूरत वाली चीजों को चुना।
कई प्रत्याशियों ने नगद नजराने के साथ साड़ियां बांटी तो किसी ने प्रेशर कुकर घरों में पहुंचाए। जीत का गणित फिट करने के लिए अपने वोट सहेजने के साथ-साथ प्रत्याशियों का फोकस प्रतिद्वंदी के वोट बैंक में सेंधमारी पर भी बराबर रहा। खासकर विरोधियों के प्रभाव वाले क्षेत्रों में तोहफे बांटे गए। समर्थकों ने दिनभर घूम घूमकर घरों में दस्तक दी। नगदी, शराब व तोहफे बांटने का सिलसिला आधी रात के बाद तक चला। कुल मिलाकर मतदान से एक दिन पहले मतदाताओं को लुभाने में प्रत्याशियों ने पूरी ताकत झोंक दी।