हरिद्वार। सरकार की ओर से कुपोषण को मात देने के लिए मुफ्त पोषाहार योजना तो शुरू कर दी है, लेकिन स्थिति यह है कि आंगनबाड़ी केंद्रों पर चार माह बीत जाने के बाद भी पोषाहार नहीं पहुंचा है। जिले के लगभग डेढ़ लाख लाभार्थी पोषाहार मिलने का इंतजार कर रहे हैं। ऐसे में सवाल खड़ा हो रहा है कि जब पोषाहार ही नहीं मिलेगा तो सरकार की ओर से कुपोषण पर वार कैसे किया जाएगा।
सरकार की ओर से किशोरियों, बच्चों और गर्भवती महिलाओं को आंगनगाड़ी केंद्रों से पोषाहार दिया जाता है। इसमें सरकार की ओर से त्रैमासिक किस्त का पोषाहार एक ही बार दे दिया जाता है। पोषाहार में पहले गेहूं और चावल दिया जाता था, लेकिन अप्रैल, मई, जून की किस्त में मंडुआ भी जोड़ दिया गया था। जुलाई में ये पोषाहार पात्र लाभार्थियों को वितरित कर दिया गया था। दूसरी किस्त जुलाई, अगस्त, सितंबर का पोषाहार अक्तूबर में मिल जाना चाहिए था, लेकिन नवंबर के नौ दिन गुजर जाने के बाद भी पोषाहार वितरण केंद्रों से नहीं हो सका है, जिससे केंद्रों पर आने वाले नौनिहालों और महिलाओं को पोषाहार नहीं मिल रहा है। उन्हें जुलाई से लेकर अक्तूबर तक केंद्रों से बैरंग लौटना पड़ रहा है। लाभार्थियों की ओर से पोषाहार नहीं मिलने से केंद्र की आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों पर भी आरोप लगाए जा रहे हैं। जिससे वो भी परेशानी हो चुकी हैं।
जिले की 11 परियोजना से होता है वितरण
सरकार की ओर से आंगनबाड़ी केंद्रों पर जिले की 11 परियोजनाओं के माध्यम से पोषाहार का आवंटन किया जाता है। जिसे राजकीय गोदामों से उठाकर सरकारी राशन डीलर के जरिए आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों तक पहुंचाया जाता है। केंद्रों पर पहुंचने के बाद पोषाहार को लाभार्थियों को वितरित किया जाता है, लेकिन अक्तूबर में वितरित होने वाला पोषाहार अब तक नहीं दिया गया है।
सरकार की ओर से पोषाहार का आवंटन नहीं किया गया था। इस वजह से लाभार्थियों को नहीं बांटा गया था, लेकिन अब पोषाहार का आना शुरू हो गया है। जल्द आंगनबाड़ी केंद्रों से पोषाहार का वितरण शुरू कराया जाएगा।
-सुलेखा सहगल, जिला कार्यक्रम अधिकारी, हरिद्वार