हरिद्वार। अर्द्धकुंभ मेला में शिविर लगाने वाली 65 संस्थाओं ने अभी तक निर्धारित शुल्क जमा नहीं किया है। ऐसी संस्थाओं को मेला प्रशासन नोटिस जारी किया है।
मेला प्रशासन ने धार्मिक संस्थाओं को भूमि आवंटित की है। अभी तक केवल 115 संस्थाओं से लगभग 4 लाख 32 हजार रुपये का शुल्क प्राप्त हुआ है। 15 धार्मिक संस्थाएं ऐसी हैं जिन्हें मेला प्रशासन ने नि:शुल्क सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई हैं। इनमें शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती व शंकराचार्य निश्चलानंद महाराज के शिविरों की व्यवस्था भी शामिल हैं। जिन संस्थाओं ने भूमि आवंटन के बाद शुल्क जमा नहीं कराया है। मेला प्रशासन की ओर से अब उन्हें शुल्क जमा कराने के लिए नोटिस भेजा जा रहा है। अब लगभग 65 संस्थाओं को नोटिस भेजा जा चुका है। इसके बाद भी शुल्क जमा नहीं कराने वाली संस्थाओं का आवंटन निरस्त करने की कार्रवाई की जानी है।
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शंकराचार्य नवरात्र में हरिद्वार में रहेंगे
हरिद्वार। शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती इस बार नवरात्र में हरिद्वार में रहेंगे। शंकराचार्य 7 से 15 अप्रैल तक रहेंगे। अर्द्धकुंभ मेला में गंगातट पर नीलधारा चंडी द्वीप में सबसे बड़ा पंडाल सवा लाख वर्ग फीट में फैला है। देश के विभिन्न प्रांतों से बड़ी संख्या में शंकराचार्य के अनुयायी भी हरिद्वार में रहकर नवरात्र के व्रत व पूजा अर्चना करेंगे। इसके साथ ही शंकराचार्य निश्चलानंद महाराज भी 10 अप्रैल को हरिद्वार पहुंचने वाले हैं। उनका शिविर भी गंगा किनारे चंडी द्वीप में है।
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इनके शिविरों में नहीं है कोई
हरिद्वार। स्वामी अधोक्षजानंद महाराज और परी अखाड़ा के शिविर खाली पड़े हैं। इन शिविरों को बनाने में मेला प्रशासन ने लाखों रुपये खर्च किए हैं। मेलाधिष्ठान के सूत्रों ने बताया कि अभी तक यह जानकारी है कि स्वामी अधोक्षजानंद और त्रिकाल भवंता नहीं आ रही हैं। अधोक्षजानंद के लिए नि:शुल्क 40 हजार वर्ग फीट में गौरीशंकर द्वीप में शिविर बनाया है और त्रिकाल भवंता शिविर भी 30 हजार वर्ग फीट में बैरागी कैंप में शिविर बनाया है।