रुड़की में केवल एक-एक हजार रुपये के फसलों के मुआवजा राशि के चेक बांटने में भी अधिकारी किसानों के साथ मजाक कर रहे हैं। भगवानपुर तहसील के अधिकारियों ने साढ़े तीन साल पहले मर चुके चुड़ियाला के किसान के नाम बर्बाद फसल का मुआवजा चेक जारी कर दिया,
जबकि खेतीबाड़ी कर रहे मृतक के वारिसों को एवं उक्त गांव के कई पीड़ित किसानों को मुआवजा नहीं दिया गया। इससे तहसील की बड़ी लापरवाही तो सामने आ ही रही है, वहीं तहसील के अधिकारियों-कर्मचारियों की ओर से किए गए बर्बाद फसलों के सर्वे पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
मार्च-अप्रैल माह में आई बेमौसम बरसात से किसानों के खेतों में खड़ी गेहूं की फसल बर्बाद हो गई थी। कांग्रेस नित सरकार ने किसानों के नुकसान के घावों पर मरहम लगाने के लिए 900 रुपये प्रति बीघा मुआवजा राशि और कम से कम 1500 रुपये का चेक जारी करने की घोषणा की थी।
पहली किस्तों में यह लाभ किसानों को मिल भी गया था, लेकिन बाद में सरकार ने पूर्व के आदेशों को बदलते हुए महज एक-एक हजार रुपये का चेक जारी करने के लिए तहसीलों में बजट भेज दिया था। लेकिन, सरकार के नुमाइंदे इस मुआवजे राशि को बांटने में भी किसानों का मखौल उड़ा रहे हैं।
दरअसल चुड़ियाला गांव निवासी भुल्लण सिंह त्यागी पुत्र सगवाराम त्यागी की मृत्यु 12 मार्च 2012 को हो गई थी। उनकी पत्नी सुशीला देवी पुत्र संजय त्यागी, प्रवीण त्यागी एवं राजेश त्यागी के नाम जमीन आ गई थी और तब से यही लोग खेतीबाड़ी कर रहे हैं।
भगवानपुर तहसील के अधिकारियों ने खेतीबाड़ी कर रहे वारिसों को मुआवजे के चेक जारी करने की बजाए मृतक भुल्लण सिंह के नाम ही एक हजार रुपये का चेक जारी कर दिया। जब चेक घर पर पहुंचा तो परिवार के सभी लोग हक्के-भक्के रह गए।
चुड़ियाला के कई ग्रामीणों को मुआवजा राशि के चेक नहीं मिले हैं, जबकि मृतक के नाम चेक बना दिया गया है। इससे कर्मचारियों की लापरवाही की बड़ी पोल खुलकर सामने आ रही है।