फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कनेक्टीविटी के फेर में उलझा मोदी का विजन

Wed, 10 Aug 2016 12:22 AM IST
hridwar uttrakhanda india
विज्ञापन
विज्ञापन
हरिद्वार। आमजन से जुड़ी सरकारी सेवाएं ऑनलाइन करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का महत्वाकांक्षी ‘डिजिटल इंडिया अभियान’ हरिद्वार में कनेक्टीविटी के फेर में उलझता नजर आ रहा है। सरकारी राशन की कालाबाजारी रोकने और राशन वितरण के डिजिटलाइजेशन के लिए लगाई गई बॉयोमेट्रिक मशीनों के पायलेट प्रोजेक्ट में ही तमाम अड़चनें सामने आ रही हैं। कहीं मशीन इंटरनेट से कनेक्ट नहीं हो पा रही है तो कहीं उपभोक्ताओं की संख्या मशीन पर भारी पड़ रही है। राशन मिलने में जल्दी के बजाय देर होने से लोगों को भी तकनीक नागवार गुजर रही है।
विज्ञापन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले दिनों डिजिटल इंडिया कार्यक्रम की शुरूआत की जिसका उद्देश्य अधिक से अधिक जनता को सरकारी विभागों से जोड़ना और बिना कागज का इस्तेमाल किए सरकारी सेवाएं इलेक्ट्रॉनिक रूप में जनता तक पहुंचाना है। इसी के तहत सरकारी राशन की दुकानों का डिजिटलाइजेशन शुरू किया गया है। योजना के मुताबिक उपभोक्ताओं को हर महीने राशन कार्ड लाने की जरूरत नहीं है। बायोमेट्रिक मशीन पर अंगूठा लगा कर राशन बांटा जाए। इससे राशन प्रक्रिया में तेजी आने के साथ ही कालाबाजारी पर भी रोक लग सकती है। हरिद्वार में जिला पूर्ति विभाग ने पिछले दिनों पायलेट प्रोजेक्ट के तौर पर दो सरकारी राशन की दुकानों पर बायोमेट्रिक मशीनें लगाई थीं। मशीन लगने से भले ही राशन वितरण प्रक्रिया में पारदर्शिता आई है, पर तमाम दिक्कतें भी सामने आ रही हैं।
ज्वालापुर लोधामंडी में लगाई गई मशीन में बार-बार कनेक्टीविटी की दिक्कत आ रही है। मशीन इंटरनेट से कनेक्ट ही नहीं हो पा रही है जबकि ब्रह्मपुरी में मशीन उपभोक्ताओं की संख्या झेल नहीं पाई। नतीजतन मशीन महीने भर से खराब पड़ी है। कनेक्टीविटी का इंतजार करने पर उपभोक्ताओं की डीलरों से नोंक झोंक भी हो रही है। पायलेट प्रोजेक्ट के दौरान शहरी क्षेत्र में ऐसी बाधाएं सामने आने पर देहात में योजना की सफलता को लेकर शंका पैदा हो रही है।
विज्ञापन


ऐसे काम करती है बायोमेट्रिक मशीन
सरकारी राशन की दुकानों पर लगने वाली बायोमेट्रिक मशीनों को इंटरनेट के माध्यम से आधार से लिंक किया जाता है। आधार बनवाने के दौरान परिवार के सभी सदस्यों के अंगूठे के नमूने मशीन से लिए गए हैं। परिवार का कोई भी सदस्य जब राशन लेने दुकान पर जाएगा तो मशीन पर अंगूठा लगाएगा। आधार से लिंक मशीन अंगूठे के निशान को आधार में पहले से फीड अंगूठे के नमूने से मैच करेगी। इसके बाद ही राशन मिल पाएगा। जैसे-जैसे राशन बंटता रहेगा, वैसे-वैसे कोटे की जानकारी ऑनलाइन अपडेट होती रहेगी। डीलर उपभोक्ताओं का राशन हजम नहीं कर पाएगा। दिक्कत यह है कि इंटरनेट के काम न करने पर राशन नहीं मिल पाएगा।

कई राज्यों में फेल हो चुका है प्रयोग
 बायोमेट्रिक मशीनों से राशन बांटने का प्रयोग उत्तराखंड से पहले कई राज्यों में फेल हो चुका है। राजस्थान, मध्य प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, पंजाब व हरियाणा में बायोमेट्रिक मशीनें कारगर साबित नहीं हो पाई है। इसके बावजूद उत्तराखंड में इसे सफल करने के पूरे  प्रयास किए जा रहे हैं।

बायोमेट्रिक मशीनों से राशन वितरण के लिए दो दुकानों पर मशीन लगाई गई थी। इंटरनेट की समस्या के कारण वितरण में दिक्कत की शिकायतें आ रही हैं। दूसरी जगह मशीन खराब होने से उसे शासन में भेजा गया है। पायलेट प्रोजेक्ट में जो बातें सामने आ रही हैं उनसे शासन को अवगत कराया जा रहा है।  राहुल शर्मा, जिला पूर्ति अधिकारी हरिद्वार
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें