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बाढ़ से बचने के लिए गंगा में खनन जरूरी : नेगी

Wed, 01 Jun 2016 12:03 AM IST
hridwar uttrakhanda india
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खनन खोलने की वकालत - फोटो : अमर उजाला
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हरिद्वार। स्वास्थ्य मंत्री सुरेंद्र सिंह नेगी ने मेला नियंत्रण कक्ष में गंगा में रायवाला से भोगपुर तक खनन व चुगान को लेकर साधु-संतों एवं अखाड़ा प्रमुखों के साथ बैठककर राय ली। स्वास्थ्य मंत्री सुरेंद्र सिंह नेगी ने सबके साथ मशविरा करने के बाद कहा कि बरसात के समय नदियों में बाढ़ आने से नदी के सेंटर में उठाव की स्थिति बन जाती है। जिसके कारण नदी अपने बहने वाले मूल बिंदु से हटकर रास्ता बदल लेती है, जिससे इस क्षेत्र में काफी कृषि योग्य भूमि बह जाती है।
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मंगलवार की शाम को हुई बैठक में स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि गंगा की सफाई के दृष्टिगत एवं गंगा के सम्मान एवं स्वरूप को किसी प्रकार का नुकसान न हो। इस संबंध में उन्होंने संत समाज से चर्चा की। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में रोजगार के सीमित संसाधन है। इस क्षेत्र के लोगों का खनन व चुगान आजीविका का साधन है। उन्होंने संत समाज से निर्धारित मानकों के अनुसार वैज्ञानिक तरीके से गंगा की सफाई के संबंध में सुझाव मांगे। बैठक में उपस्थित साधु-संतों, अखाड़ा प्रमुखों ने अपनी राय देते हुए कहा कि गंगा की सफाई होना जरूरी है, निर्धारित मानकों तथा वैज्ञानिक तरीके से चुगान का कार्य किया जाए जिससे गंगा की अविरल धारा बहती रहे। साधु-संतों ने यह भी सुझाव दिया कि खनन पर सरकार का पूर्ण नियंत्रण हो, हरकी पैड़ी की तरह अन्य घाटों पर भी सफाई की जाए, रायवाला से भोगपुर तक जहां टीलों की वजह से गंगा में अवरोध पैदा हो रहा है वहां पर खनन एवं चुगान की अनुमति प्रदान की जाए। साधु-संतों ने कहा कि निर्धारित मानकों के अनुसार खनन एवं चुकान होने से जहां गंगा का प्रवाह तंत्र भी सही रहेगा और सरकार को राजस्व आय की भी प्राप्ति होगी, इसलिए प्रत्येक वर्ष गंगा की सफाई होना अनिवार्य है। साधु-संतो एवं अखाड़ा प्रमुखों के सुझाव लेने के पश्चात स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि उनका उद्देश्य खनन व चुगान के संबंध में  संत-समाज एवं जनमत संग्रह की बात सरकार तक पहुंचाना है। इस संबंध में कैबिनेट में जो भी निर्णय लिया जाएगा वह सर्वसम्मति से लिया जाएगा। इस अवसर पर महामंडलेश्वर स्वामी प्रेमानंद महाराज, महामंडलेश्वर स्वामी सहज प्रकाशानंद, जूना अखाड़ा के महंत विनोद गिरी, आचार्य अनूप महाराज, स्वामी भरत मुनि, महंत साधनानंद, हरेराम गिरी, पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष सतपाल ब्रह्मचारी, नगर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अंशुल श्रीकुंज, जिलाधिकारी हरबंस सिंह चुघ, अपर सचिव खनन विनय शंकर पांडे, एसपी सिटी नवनीत सिंह, सीएमओ डा. आरती ढौंढ़ियाल, उपजिलाधिकारी हरिद्वार प्रत्यूष सिंह आदि उपस्थित थे।
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शामिल नहीं मातृसदन के परमाध्यक्ष
- बोले कि बैठक में शामिल हुए सभी साधु-संत गंगाद्रोही
अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार। खनन एवं चुगान को लेकर हुई बैठक में मातृसदन से कोई भी प्रतिनिधि शामिल नहीं हुआ। मातृसदन के परमाध्यक्ष स्वामी शिवानंद सरस्वती ने बताया कि बैठक में जो साधु-संत शामिल हुए वह भंडारा खाने वाले और खनन कराने वालों के समर्थक हैं। सप्तऋषि क्षेत्र में जो धरना प्रदर्शन साधु-संतों ने किया वह भी खनन के लिए प्रायोजित था। बोले कि इन संतों का गंगा के लिए कोई प्रेम नहीं है। वे सब गंगाद्रोही है। उन्होंने बताया कि बैठक में बुलाने पर शर्त रखी गई थी कि 5 मिनट में अपना पक्ष रखना है, लेकिन 5 मिनट में उनका पक्ष नहीं रखा जा सकता था। जिससे उन्होंने लिखित में अपना पक्ष दिया है। उन्होंने कहा कि गंगा में खनन के लिए वैज्ञानिक भी पक्षधर नहीं हैं। जो व्यक्ति यह कहते है कि गंगा में पत्थर बहकर आता है तो वह बताए कि बहकर आने वाला पत्थर कहां पर जमा है। उन्होंने कहा कि गंगा पर रिसर्च करने वाले उनके पास आते हैं।
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