मेला अस्पताल के भवन पर विभाग दो साल में 41 लाख रुपये मरम्मत और निर्माण कार्यों पर फूंक चुका है। लाखों रुपये खर्च करने के बाद भी इसका फायदा मरीजों को मिलता दिखाई नहीं दे रहा। इसकी वजह यहां डाक्टरों की तैनाती नहीं होना है। मेला अस्पताल केवल एक ओपीडी के भरोसे चल रहा है। यही वजह है कि यहां मरीजों ने आना ही छोड़ दिया। मरीजों की बेरुखी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि तीन साल में सौ बेड वाले अस्पताल में एक भी मरीज भर्ती नहीं किया गया और एक भी आपरेशन नहीं हुआ। एनसीडी के तहत भी नौ तकनीशियन स्टाफ को नियुक्त कर दिया है, वे भी अन्य स्टाफ की तरह खाली बैठने को मजबूर हैं। अस्पताल में नियुक्त स्टाफ पर करीब एक करोड़ रुपया तनख्वाह पर खर्च किया जा रहा है।
अर्द्घकुंभ-2004 निधि के बजट 84 लाख रुपये से मेला अस्पताल बनाया गया था। वर्तमान में यहां एक त्वचा रोग विशेषज्ञ की तैनात हैं। इसलिए दूसरे मरीज आते ही नहीं। अन्य डाक्टरों की तैनाती नहीं होने से रेडियोलाजिस्ट और पैथोलाजिस्ट भी खाली बैठे रहते हैं। पिछले साल अर्द्घकुंभ से 31 लाख रुपये से मरम्मत, रंग-रोगन आदि का काम किया गया। यह कार्य पिछले चार महीने पहले ही समाप्त हुआ है। अब फिर अस्पताल में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) की योजना गैर संचारी रोग (एनसीडी) के तहत 10 लाख रुपये से मरम्मत का कार्य शुरू हो गया है। इस बजट से अस्पताल में पुराने वार्डों में फर्श और प्लास्टर उखाड़कर टायल्स आदि लगाकर नया लुक दिया जा रहा है। अस्पताल परिसर में बनी रसोई आदि को भी वार्ड में तबदील किया जा रहा है। एनसीडी के तहत अस्पताल में 10 बेड का वार्ड बनाया जा रहा है। जिसमें पांच बेड महिला और पांच पुरुषों के लिए आरक्षित रहेंगे। इन वार्ड बनाने का उद्देश्य इलाज के साथ उनकी सेवा भाव होगा। जबकि अस्पताल में बने 100 बेड का कोई उपयोग नहीं हो रहा है। पिछले तीन साल से अस्पताल में एक भी मरीज को भर्ती नहीं किया जा सका है। जबकि अस्पताल में पहले से ही आधुनिक आईसीयू, 6 वेल्टीनेटर, पैथोलॉजी, ऑपरेशन थियेटर, अल्ट्रासाउंड, डिजीटल एक्स-रे सहित अन्य सुविधाएं उपलब्ध है। ये सभी सुविधाएं बिना डाक्टर के जंक खाने को मजबूर है।
एनसीडी का स्टाफ भी खाली
एनसीडी नॉन कम्यूनिकेबल डिजीज या गैर संचारी रोग के तहत मेला अस्पताल में तीन काउंटर बनाए गए है। इन काउंटर पर नियुक्त तकनीशियन ओपीडी में जाने से पहले मरीजों की शुगर, ब्लड प्रेशर, वजन, दांत, कैंसर, फिजियोथैरेपी आदि के लिए काउंसिलिंग करते हैं। अब सुविधा 15 मार्च से अस्पताल में शुरू हो चुकी है और नौ तकनीशियन का स्टाफ ड्यूटी कर रहा है।
अस्पताल में लंबे समय से कोई मरम्मत का कार्य नहीं हो सका है। उपयोग न होने से खंडहर जैसी स्थिति हो गई है। अर्द्घकुंभ निधि से मरम्मत कार्य कराया गया, लेकिन अब अस्पताल में स्टोर, रसोई आदि को वार्ड बनाया जा रहा है। एनसीडी के तहत मिले बजट से काउंटर और वार्ड बनाने का लाभ आगामी समय में मरीजों को मिलेगा। बजट के दुरुपयोग की बात निरर्थक है। - डा. बीएस जंगपांगी, सीएमओ।