हरिद्वार। कोविड काल के बाद पहली बार रेलवे ट्रैक पर वाइल्ड लाइफ की सुरक्षा के लिए मंथन किया गया। इसमें लाेको पायलट, ट्रेन मैनेजर, स्टेशन मास्टर, लोको सहायक, ट्रैकमैन, रेलवे के ट्रैफिक अधिकारियों और राजाजी टाइगर रिजर्व के अफसरों, कर्मचारियों ने जंगली जानवरों के साथ होने वाले हादसों को रोकने के लिए एक दूसरे को सुझाव दिए गए।
दरअसल, राजाजी टाइगर रिजर्व के जंगल से 22 किलोमीटर का हरिद्वार-देहरादून रेलवे ट्रैक गुजर रहा है, जो कांसरो, मोतीचूर और हरिद्वार रेंज के जंगल से जाता है, रेलवे ट्रैक पर हाथियों के ट्रेन में मौत हो चुकी हैं, हालांकि, वर्ष 2018 के बाद ट्रेन से ऐसा कोई हादस नहीं हुआ है, लेकिन, कोविड काल के बाद अधिकारियों के बीच समन्वय स्थापित करने के लिए इस तरह की बैठक भी नहीं हुई।
मंगलवार को रेलवे स्टेशन पर जंगली जानवरों के लिए संयुक्त बैठक का आयोजन किया गया। वन्यजीवों के साथ रेल दुर्घटनाओं के प्रभावों को रोकने के लिए उत्तर रेलवे, वन विभाग और डब्ल्यूडब्ल्यूएफ-इंडिया इंडिया की ओर से वन्यजीवों की गतिशीलता पर रेलवे के प्रभावों को कम करने की चुनौतियों और अवसरों पर चर्चा की गई।
डब्ल्यूडब्ल्यूएफ-इंडिया के तराई भूपरिधि के टीम लीडर डॉ. अनिल कुमार सिंह ने वन्यजीव संरक्षण पर रेलवे के प्रभावों को कम करने के लिए अतीत में तैयार की गई चुनौतियों और समाधानों पर प्रस्तुति दी। इंजीनियर प्रमोद ने भारत के संदर्भ में चल रही एलाइन परियोजना और इसके कार्यान्वयन पर प्रस्तुति दी।
स्टेशन अधीक्षक दिनेश कुमार और बीरेंद्र कुमार ने अधिकारियों के बीच सहयोग के लिए चल रहे संयुक्त प्रयासों की सराहना की, ताकि समस्याओं को समायोजित किया जा सके। राजाजी टाइगर रिजर्व के अजय लिंगवाल ने कहा कि यह एक ऐसा मंच है, जहां, सीखों को साझा किया जाता है। अधिकारियों के बीच सहयोग के लिए तंत्र बनाए जाते हैं, जो नीति निर्माण और कार्य को मजबूत करते हैं। जिनसे जंगली जानवरों को बचाने में मदद मिलती है। इस मौके पर हरिद्वार रेंजर बिजेंद्र दत्त तिवारी, वन दारोगा गणेश बहुगुणा, बीके मलिक, विक्रम तोमर आदि मौजूद रहे।