नोटबंदी के बाद से बाजारों में छाया सन्नाटा टूटने का नाम नहीं ले रहा है। जिन बाजारों में पूरे दिन खरीदारों की भारी भीड़ रहती थी, वहां की सड़कें खाली सी नजर आ रही हैं। स्थिति यह हो गई कि रात को समय से पहले दुकानदार अपने प्रतिष्ठानों के शटर डाउन करके घर लौट जा रहे हैं।
पांच सौ और एक हजार के पुराने नोटों को बंद करने के बाद सभी तरह का व्यापार प्रभावित हुआ है। जिन शॉपिंग मॉल में प्रतिदिन 20 लाख से अधिक की सेल होती थी वहां पर अब एक लाख तक का सामान की बिक रहा है। नोट बंद होने का असर सबसे अधिक इलेक्ट्रानिक्स, इलेक्ट्रिक, जूता, कपड़ों, बर्तन, रेडिमेड-गारमेंट्स, गिफ्ट आदि की दुकानों पर पड़ रहा है। अरू इलेक्ट्रानिक्स के मालिक अतुल सक्सेना ने बताया कि बिक्री तो दूर की बात पिछले पांच दिनों से कोई भी ग्राहक दुकान पर नहीं पहुंचा है। कारोबार मंदा है। अशोका इलेक्ट्रिकल के मालिक सुमित कुमार ने बताया कि 100-50 रुपये का सामान लेने के लिए दुकान पर लोग पहुंच रहे हैं। दुकान पर रखे कर्मी का वेतन और बिजली का बिल भी नहीं निकल रहा है।
इन बाजारों में रहती थी भारी भीड़
चंद्राचार्य चौक, पुराना रानीपुर मोड़, ज्वालापुर का सर्राफा बाजार, कटहरा बाजार, रेलवे रोड, गुरुद्वारा रोड बाजार, कनखल में झंड़ा चौक बाजार, पहाड़ी बाजार, कृष्णानगर, मोती बाजार, अपर रोड, रेलवे रोड, खड़खड़ी, बड़ा बाजार, भीमगोड़ा, सप्तसरोवर आदि बाजारों में हमेशा भीड़ होती थी,
फल और फड़ की दुकान ठप
बाजारों में लगने वाली फल, सब्जी की दुकानें, रेहड़ी फड़ वालों से सामान खरीदने के लिए ग्राहक नहीं मिल रहे है। फल की दुकान और रेहड़ी लगाने वाले सबसे अधिक परेशान है। मजदूरी निकलना तो दूर असली कीमत भी नहीं निकल रही है।
मेडिकल की दुकान पर भी असर
बड़े नोट बंद होने का असर मेडिकल व्यवसाय पर पड़ने लगा है। पहले तीन दिन तक मेडिकल स्टोर पर बड़े नोट चलते रहे है, लेकिन अब पिछले दो दिनों से लोग दवा खरीदने के लिए नहीं आ रहे हैं। मेडिकल व्यवसायी अनिल झाम्ब ने बताया कि अब दवा सहित अन्य इलाज के सामान की सप्लाई भी नहीं हो रही है।