हरिद्वार। उत्तराखंड पुलिस की एसटीएफ द्वारा बाघ की खाल के साथ पकड़े गए अंतरराज्यीय वन्य जीव तस्कर गिरोह के सदस्यों के निशाने पर कई और टाइगर भी थे। उनका शिकार करने के लिए गिरोह के सदस्यों ने पूरा जाल बुन लिया था। यह जानकारी खाल के साथ पकड़े गए आरोपियों ने पूछताछ के दौरान पुलिस और राजाजी टाइगर रिजर्व के अधिकारियों को बताई।
अधिकारियों ने गिरोह के प्रमुख सदस्य मीर हमजा को जेल भेजने से पहले उन सभी स्थानों को उसे साथ ले जाकर देखा, जहां शिकार करने की योजना बनाई गई और जहां-जहां वे ठहरे थे।
गौरतलब है कि एसटीएफ ने रविवार को संतोष दुग्गल निवासी गांव निगालपानी धारचूला, मीर हमजा निवासी बादीवाला बुग्गावाला, मोहम्मद आलम निवासी श्यामपुर हरिद्वार और दाउ पुत्र जामी निवासी जहानपुर पहाड़ी बिहारीगढ़ को टाइगर की एक खाल के साथ गिरफ्तार किया था। सभी को रायवाला थाना में मुकदमा दर्ज करने के बाद जेल भेज दिया गया था। जेल भेजे जाने से पहले पुलिस ने गैंग के मुख्य सदस्य मीर हमजा को साथ लेकर जंगल और आसपास के उन ठिकानों को देखा, जहां वे शिकार की योजना बनाते समय ठहरे थे। पार्क के उपनिदेशक किशनचंद ने बताया कि यह टाइगर भी कार्बेट रिजर्व पार्क क्षेत्र में मारा गया। गिरोह के सदस्य बिजनौर जनपद के खादरपुर गांव में स्थित वन गुर्जरों के डेरों पर ठहरे हुए थे। इस गिरोह के तार करीब डेढ़ महीने पहले कार्बेट टाइगर रिजर्व में ही टाइगर का शिकार करने वाले गिरोह के सदस्यों से जुड़े। उन्होंने बताया कि तस्करों की सक्रियता को देखते हुए पार्क में गश्त तेज कर दी गई है। वहीं दूसरी ओर डेढ़ माह पूर्व टाइगर का शिकार होने की घटना सामने आने के बाद भी दोबारा ऐसी ही पुनरावृत्ति हुई। इससे कार्बेट टाइगर रिजर्व में बाघों की सुरक्षा के दावों की भी पोल खुल गई है।