माघ मास के समापन पर देश के विभिन्न भागों से आए करीब दो लाख श्रद्धालुओं ने गंगा मैया में डुबकी लगाकर पुण्य अर्जित किया। इसके साथ ही एक महीने चला माघ स्नान और पांच दिनों की पंचस्नानी संपन्न हो गई। पर्वतीय अंचलों से खासी संख्या में श्रद्धालु गंगा तट पहुंचे।
सबसे पवित्र कहे जाने वाले माघ मास के पूरे महीने स्नान करने के लिए सैकड़ों तीर्थयात्री धर्मनगरी में रुके हुए थे। इन यात्रियों ने स्नान संपन्न होने के बाद उद्यापन भी किए। पूर्णिमा का स्नान सवेरे छह बजे से शुरू हो गया था। सूर्यादय के बाद गंगा तट पर भीड़ बढ़ती गई। श्रद्धालुओं ने उगते सूर्य को अर्घ्य प्रदान किया। कुशावर्त घाट पर जाकर यज्ञोपवीत, मुंडन, कर्ण छेदन आदि अनेक संस्कार संपन्न कराए गए। गंगा तटों पर श्रद्धालुओं ने तर्पण भी किया। भगवान भोलेनाथ के मंदिरों में पूर्णिमा पर तर्पण करने वालों की संख्या भी खूब रही। स्नान के लिए आए यात्रियों में विशेष रूप से तिल से बने पदार्थों का दान किया। मकर सक्रांति से प्रारंभ हुए तिल पर्वों का भी शुक्रवार को समापन दिवस था। माघ के अंतिम पांच दिनों में गंगा तट पर रुककर प्रतिदिन पंचस्नानी करने वालों ने पुरोहितों को यथोचित दान दिया।
आने वाले श्रद्धालुओं में उत्तराखंड के दोनों मंडलों से आए गंगा भक्तों की संख्या खूब थी। इसके अलावा हिमाचल प्रदेश और जम्मू कश्मीर से भी खासी संख्या में श्रद्धालु गंगा तट पहुंचे। दिल्ली और उत्तर प्रदेश के अनेक नगरों से यात्रियों का आगमन दिन भर जारी रहा।