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दवाइयों की लोकल खरीद बंद

Sat, 20 Feb 2016 11:39 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, हरिद्वार
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हरिद्वार। सरकारी अस्पतालों में लोकल खरीद की दवाइयों की कीमत का प्रतिशत बढ़ाए जाने पर सप्लायर ने दवाएं सप्लाई करने से इनकार कर दिया है। ऐसे में अब सरकारी अस्पतालों में पात्र मरीजों को वही दवाइयां मिल सकेंगी जो अस्पताल में उपलब्ध है। लोकल खरीद पर 16 फरवरी से अनिश्चितकाल के लिए रोक है, जब तक कि नए टेंडर नहीं हो जाते।
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सरकारी अस्पतालों के द्वारा दवाइयों की लोकल खरीददारी (एलपी) की जाती है। यह वह दवाएं खरीदी जाती है जो कि अस्पताल में उपलब्ध नहीं होती है। सीएमएस को अधिकार होता है कि वह किसी भी मरीज के लिए या आपातकाल में यह दवाएं खरीद सकते हैं। दूसरे अभी तक इन दवाइयों के लिए खरीददारी करने के लिए टेंडर के अनुसार दवाइयों पर प्रिंट कीमत से 10 प्रतिशत कम पर खरीदी जाती थी, अब नए शासनादेश के अनुसार यह दवाएं 16 प्रतिशत कम पर खरीदी जानी हैं। जिसके चलते सप्लायर एजेंसी ने प्रतिशत कम होते ही दवाएं देनी बंद कर दी हैं। इससे अब पात्र मरीजों को केवल वहीं दवाएं मिलेंगी जोकि अस्पताल में उपलब्ध है। चीफ फार्मासिस्ट बीएस बुटोला ने बताया कि 16 फरवरी से वहीं दवाइयां दी जा रही है जोकि उपलब्ध है।

इन मरीजों के लिए खरीदी जाती हैं दवा
दवाइयों की लोकल खरीददारी स्वतंत्रता सेनानियों के लिए, वीआईपी के लिए, राज्य आंदोलनकारियों के लिए, न्यायाधीशों के लिए, साथ ही लावारिस वार्ड में भर्ती सहित निर्धन मरीजों के लिए विशेष परिस्थिति में दवाएं खरीदी जाती है।
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लोकल खरीददारी का प्रतिशत 10 से बढ़ाकर 16 कर दिया गया है। ऐसे में सप्लायर एजेंसी ने दवाएं देना बंद कर दिया है। फिलहाल ऑडिट होना है, इसके बाद नए तरीके से टेंडर किया जाएगा। जो भी एजेंसी नए शासनादेश के अनुसार शर्तों का पालन करेंगी, उससे ही दवाएं खरीदी जाएगी। शेष निर्णय शासन की अनुमति पर लिया जाएगा। फिलहाल एलपी पूर्णतया बंद है।
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डा. ज्योति बोहरा, सीएमएस, जिला अस्पताल।
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