हरिद्वार। मातृसदन के परमाध्यक्ष स्वामी शिवानंद सरस्वती ने कहा कि वन विभाग की भूमि में कहीं भी खनन की अनुमति न होने के बावजूद रवन्ने काटे जा रहे हैं। वन विभाग के अधिकारी भी बड़े-बड़े कारनामे कर रहे हैं। विभाग ने दो मई को 20 मई का रवन्ना काट दिया। केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय की टीम की जांच में सोमवार को यह मामला सामने आया है।
मंगलवार को मातृसदन में प्रेसवार्ता कर स्वामी शिवानंद सरस्वती ने बताया कि खनन खोलने की अनुमति का उन्होंने विरोध किया था। बावजूद इसके केंद्रीय मंत्रालय ने जिला हरिद्वार में खनन खोलने के निर्देश जारी कर दिए। उसके बाद मंत्रालय को फिर शिकायतों का रिमांइडर भेजा गया। सोमवार को केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय की टीम ने बिशनपुर, श्यामपुर, चिड़ियापुर, रवासन एक एवं दो, कोटावाली साइट का स्थलीय निरीक्षण किया। इसमें साबित हो गया कि ऊपर से बहकर कोई पत्थर नहीं आता। इसका प्रमाण यह है कि भीमगोड़ा बैराज पर पत्थर तक जमा नहीं है। चंडीघाट पर वर्ष 1996 से 98 तक हुए खनन के गड्ढे आज तक नहीं भर पाए हैं। चंडीपुल के पिलर के पास हुए गड्डे भी नहीं भर पाए हैं।
रवासन नदी एक एवं दो में खनन नहीं किया जा सकता। कोटावाली में खेती होती है। जो बालू बहकर आता है वह रुकता ही नहीं है। निरीक्षण के दौरान यह भी सामने आया कि नदियों में पत्थर रहना आवश्यक है। ऐसे में रायवाला से भोगपुर तक खनन नहीं हो सकता।
‘गंगा दैवीय नदी’
गंगा में घटते जलस्तर पर स्वामी शिवानंद ने चिंता जताई। उन्होंने कहा कि गंगा केवल आध्यात्मिक कार्य के लिए आई है। लेकिन जिस तरह से गंगा को दोहन व्यापार के लिए हो रहा है और संत महात्मा गंगा दोही हो गए हैं। ऐसे में एक दिन गंगा लुप्त हो जाएगी। इसी तरह से सरस्वती नदी भी लुप्त हो गई है। स्वामी शिवानंद सरस्वती ने कहा कि भाजपा के दो विधायक स्वामी यतीश्वरानंद और संजय गुप्ता खनन कराने वालों के समर्थक हैं। यह दोनों विधायक खनन की वकालत करते है, लेकिन इन्हें यह नहीं पता कि गंगा से लोगों का अस्तित्व है।