राजाजी टाइगर रिजर्व जंगल में लैंटाना को उखाड़कर उसकी जगह घास के मैदान तैयार किए जाएंगे। इसके लिए घास की नर्सरी तैैयार करने का कार्य शुरू कर दिया गया है।
राजाजी टाइगर रिजर्व के जंगल में हाथी, हिरन, सांभर, नील गाय, माहे आदि ऐसे जंगली जानवर बड़ी संख्या में रहते हैं। यह जंगली जानवर घास पर ही निर्भर रहते हैं। पिछले वर्षों से जंगल में घास के मैदान कम हो रहे हैं। उनकी जगह झाड़ीनुमा लैंटाना ने जंगल में बड़ी तेजी के साथ अपने पैर फैलाए हैं। जबकि इस लैंटाना का जंगली जानवरों को कोई लाभ नहीं है। जहां लैंटाना उगता है, उसके नीचे घास नहीं उगती।
इसकी वजह से घास के मैदान कम होने से जंगली जानवर भी घास की तलाश करते हुए आबादी क्षेत्र में पहुंच जा रहे हैं। इसको देखते हुए अब राजाजी टाइगर रिजर्व प्रशासन ने लैंटाना को जड़ से उखाड़ फेंकने का अभियान शुरू कर दिया है। लैंटाना को खत्म करके राजाजी प्रशासन जंगली घास के मैदान तैयार करेगा।
इसके लिए हरिद्वार रेंज के रानीपुर गेट के पास खड़ी लैंटाना को उखाड़कर करीब एक हेक्टेयर जमीन पर घास की नर्सरी तैयार की जा रही है। इस पर हाथी घास, पानी घास, गोल्डा घास, मूंज (सेक्रयम घास ) आदि की पौध तैयार की जाएगी। घास की पौध को तैयार करने के बाद उखाड़े गए लैंटाना की जगह लगा दी जाएगी। संवाद
हर साल सौ हेक्टेयर तैयार होंगे घास के मैदान
राजाजी टाइगर रिजर्व के रेंजर विजय कुमार सैनी ने बताया कि एक हेक्टेयर नर्सरी तैयार करने के लिए दस लाख रुपये का बजट मिला है। जिसमें से छह लाख रुपये नर्सरी तैयार करने और चार लाख रुपये से जंगली जानवरों को नर्सरी बचाने के लिए सोलर फेंसिंग की जाएगी। उन्होंने बताया कि एक हेक्टेयर नर्सरी से हर साल सौ हेक्टेयर घास के मैदान तैयार हो सकेंगे।
उन्होंने बताया कि लैंटाना को उखाड़ने के लिए कर्मचारियों को लगाया गया है। घास की नर्सरी बनाने का कार्य भी शुरू कर दिया गया है। फरवरी से नर्सरी में घास की पौध लगानी शुरू कर दी जाएगी। आने वाली बरसात में जुलाई-अगस्त से पौध से जंगल में घास के मैदान तैयार करने शुरू कर दिए जाएंगे।