काशी स्थित काशी विद्वत परिषद ने स्वामी अच्युतानंद तीर्थ के विरुद्ध वैदिक अनुशासन का उल्लंघन करने और असंवैधानिक कार्य करने का आरोप लगाया है। परिषद ने सर्व सम्मति से भर्त्सना प्रस्ताव पारित करते हुए आदेश दिया कि भविष्य में कोई भी संत ऐसा धर्म विरुद्ध कार्य करने का प्रयास न करे। सनातन धर्म की परंपराओं के विपरीत शंकराचार्य घोषित अच्युतानंद तीर्थ को कहीं भी सम्मान प्रदान न किया जाए।
बृहस्पतिवार को काशी में विद्वत परिषद की बैठक बुलाई गई। बैठक में आरोप लगाया गया कि सनातन धर्म के विरुद्ध ही नहीं बल्कि अच्युतानंद ने आदि शंकराचार्य द्वारा रचित मठाम्नाय के विरुद्ध भी काम किया है। उन्होंने स्वयं ही अपने लिए मठाम्नाय एवं महानुशासन रच लिया। इसके आधार पर किसी को भी शंकराचार्य या किसी अन्य पद की उपाधि नहीं दी जा सकती। काशी विद्या मठ में दंडी स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने इस बैठक की अध्यक्षता की। न्याय दर्शन के विद्वान आचार्य वशिष्ठ त्रिपाठी ने कहा कि शंकराचार्य की परंपरा से छेड़छाड़ करने वाले किसी भी संत को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। काशी विद्वत परिषद के अध्यक्ष आचार्य रामयत्न शुक्ल ने कहा कि यह विद्वत परिषद अति प्राचीन काल से चली आ रही है। इसके अलावा और कोई परिषद नहीं है। विद्वत परिषद की स्थापना ही इसलिए हुई थी कि योग्य व्यक्ति शंकराचार्य पद पर आएं। अच्युतानंद को पीठ ने कोई भी मान्यता कभी नहीं दी। उन्होंने भर्त्सना प्रस्ताव रखा, जिसे सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया।
विद्वान आचार्य पंडित राम किशोर त्रिपाठी ने कहा कि मठाम्नाय और महानुशासन में आदि शंकराचार्य ने निर्देश दिया है कि यदि कोई अयोग्य व्यक्ति शंकराचार्य बन गया हो तो विद्वत परिषद उसे तत्काल पदच्युत कर दे। जिस व्यक्ति को हनुमान चालीसा तक पढ़ना नहीं आता, वह शंकराचार्य नहीं बन सकता। बैठक में विद्वत परिषद के आचार्य कृष्णानंद उपाध्याय, पंडित शिवजी उपाध्याय, मीमांसा के विद्वान आचार्य कमलाकांत त्रिपाठी, कर्मकांड के विद्वान पंडित अवधराम पांडेय, दक्षिण मूर्ति मठ के सुबोधानंद, आचार्य वशिष्ठ त्रिपाठी, स्वामी सदाशिव ब्रह्मेन्द्रानंद सरस्वती, ब्रह्मचारी ज्योर्तिमयानंद, योगेश्वरानंद, उद्धव स्वरूप, परमानंद उपाध्याय आदि उपस्थित थे। संचालन काशी हिंदू विश्वविद्यालय के व्याकरणाचार्य आचार्य रमाकांत पांडेय ने किया। काशी विद्वत परिषद न्यास के अध्यक्ष डा. शिव प्रकाश मिश्र ने धन्यवाद ज्ञापित किया।