हरिद्वार। 19 जुलाई से शुरू हुई कांवड़ यात्रा 31 जुलाई की रात खत्म हो गई। इस दौरान बाहरी राज्यों से करोड़ों शिवभक्त गंगाजल लेने हरिद्वार पहुंचे। अंतिम दो दिनों में कई लाख कांवडिए यहां पहुंचे। गंगा के घाट, मैदान, पार्किंग और सड़कों के किनारे कचरे के ढेर छोड़ गए। सबसे ज्यादा दिक्कत कांवड़ियों के जगह-जगह मल-मूत्र त्यागने से खड़ी हुई है। स्थिति यह है कि दुर्गंध के चलते ऐसी जगह से गुजरना भी मुश्किल हो रहा है।
कांवड़ मेले के दौरान यूपी, हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान से करोड़ों श्रद्धालु हरिद्वार गंगा जल लेने पहुंचे। मेले के दौरान 12 दिन हरकी पैड़ी सहित आसपास के मालवीय घाट, सुभाषघाट, गऊघाट, रामघाट, विष्णुघाट, बिरला घाट, कांगड़ा घाट जैसे गंगा घाटों पर शिवभक्तों का रेला उमड़ा। अब कांवड़ मेला निपटने के बाद गंगा घाट कांवड़ियों से खाली हुए तो चारों तरफ गंदगी ही गंदगी नजर आ रही है। पार्किंग के लिए इस्तेमाल किए गए रोड़ीबेलवाला और बैरागी कैंप मैदान में भी कूड़े लगे हैं।
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अपील का नहीं हुआ असर
हरिद्वार। कांवड़ मेले में पॉलिथिन इस्तेेमाल न करने और जगह जगह गंदगी न करने की अपील श्रद्धालुओं से की गई। खासकर एनजीटी के आदेशों का पालन करने के संबंध में नगर निगम ने मेला क्षेत्र में फ्लैक्स बोर्ड लगवाए। साथ ही लाउडस्पीकर से भी शिवभक्तों से गंगा घाटों को साफ सुथरा रखने की अपील की गई। इस अपील का कुछ असर दिखाई नहीं दिया।
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नगर निगम ने शुरू किया कूड़ा उठाना
हरिद्वार। सोमवार को नगर आयुक्त विप्रा त्रिवेदी नगर निगम की टीमों को लेकर हरकी पैड़ी पर पहुंची और गंगा घाटों से साफ सफाई शुरू कराई। हरकी पैड़ी सहित आसपास के गंगा घाटों से करीब 30 ट्राली कूड़ा उठाया गया। रोड़ीबेलवाला, बैरागी कैंप जैसे खुले मैदानों में भी बड़े पैमाने पर गंदगी पसरी मिली। इसे उठाकर छिड़काव करने का काम भी शुरू कर दिया गया है।