लॉकडाउन के दौरान ज्वालापुर पुलिस के हत्थे एक फर्जी दरोगा चढ़ा है। पिछले तीन दिन से यह फर्जी दरोगा सिडकुल, रानीपुर और ज्वालापुर क्षेत्र में राउंड लेकर रात्रि ड्यूटी पर पुलिसकर्मियों की क्लास ले रहा था। देर रात ही ज्वालापुर पुलिस ने संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज करते हुए आरोपी फर्जी दरोगा को गिरफ्तार कर लिया।
बृहस्पतिवार की देर रात अहबाब नगर में बैरियर पर तैनात पुलिसकर्मियों ने सफेद रंग की अपाची मोटरसाइकिल पर तैनात दरोगा की वर्दी पहने एक युवक को रोक लिया। खुद को प्रदेश पुलिस मुख्यालय से स्पेशल ड्यूटी पर भेजे जाने की बात कहकर युवक ने पुलिसकर्मियों पर रौब झाड़ना चाहा, लेकिन जब पुलिसकर्मियों ने सवाल दागे तब वह अधिक देर टिक न सका। पुलिसकर्मियों की सूचना पर सीओ सिटी अभय प्रताप सिंह, कोतवाली प्रभारी योगेश सिंह देव तुरंत पहुंच गए। युवक को पकड़कर कोतवाली लाया गया। पूछताछ में उसने अपना नाम जयनेंद्र सिंह (25) पुत्र सुधाकर निवासी मिर्जापुर इलाहाबाद यूपी हाल निवासी रोशनाबाद सिडकुल बताया। पूछताछ में युवक ने कबूला कि वह दरोगा के पद पर भर्ती होने की ख्वाहिश रखता है लेकिन भर्ती नहीं हो सका।
इसलिए उसने दरोगा की वर्दी सिलवा ली। बाकायदा बैज, स्टार, बेल्ट से लेकर, नकली पिस्टल, नकली वायरलेस सेट भी खरीद लिया था। बकौल सीओ सिटी की आरोपी पिछले तीन दिन से रानीपुर, सिडकुल और ज्वालापुर क्षेत्र में रात में गश्त पर निकलता था। वह बैरियरों पर तैनात पुलिसकर्मियों को सही ढंग से ड्यूटी करने की बात कहकर हड़काता था और रात में घूमने वाले आमजन को भी फटकार लगाता था। बताया कि आरोपी के खिलाफ संबंधित धारा में मुकदमा दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया। आरोपी का पिता एक सरकारी विभाग में चालक के पद पर कार्यरत है। युवक खुद को कभी बारहवीं पास तो कभी बीटेक बता रहा है।
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परिवार को भी दरोगा होने की दी जानकारी
हरिद्वार। पुलिस में भर्ती होने का जुनून युवक के सिर इस कदर चढ़कर बोल रहा था कि उसने अपने परिवार में भी यह बताया हुआ था कि वह उत्तराखंड पुलिस में दारोगा है। मोटरसाइकिल पर भी पुलिस लिखा हुआ था। बाकायदा उत्तराखंड पुलिस का पुलिस चिन्ह भी पेंट करवाया और डंडे को फिट करने के लिए भी अलग से जगह बनाई हुई थी।
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तीन थाने कोतवाली पुलिस की खुली पोल
हरिद्वार। पिछले तीन दिन से युवक हरिद्वार पुलिस की आंखों में धूल झोंकता रहा। वह भी तीन तीन थानों की। अंत में ज्वालापुर पुलिस के हत्थे चढ़ा। हालांकि अब तक यह बात नहीं सामने आई है कि उसने दारोगा बनकर किसी से धन उगाही तो नहीं की है। वह सिडकुल क्षेत्र से अपने घर से निकलता था और पुलिस को गरियाता था। कोई उसे पहचान नहीं पाया कि फर्जी दरोगा है। सिडकुल से ज्वालापुर तक एक दो नहीं बल्कि कई बैरियर है। इसके बाद भी पहले ही दिन उसके नहीं पकड़े जाने पर सवाल खड़े हो रहे हैं।