हरिद्वार। उत्तराखंड पर्यावरण संरक्षण एवं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीसीबी) के निर्देश पर तीन होटलों के पानी के कनेक्शन काटने पहुंचे जल संस्थान के अवर अभियंता के साथ होटल संचालकों ने धक्कामुक्की की। होटल संचालकों का कहना था कि पीसीबी के इस निर्णय पर उन्हें स्टे मिला हुआ है। 27 अगस्त तक उन्हें सभी प्रक्रियाएं पूरी करनी है। स्टे की कापी मिलने के बाद ही मामला शांत हुआ।
एनजीटी के नियमों के तहत पीसीबी के निर्देश पर शहर के तीन होटल राज डीलक्स, सचिन इंटरनेशनल, त्रिशूल के बिजली-पानी के कनेक्शन काटने के निर्देश थे। शुक्रवार को जल संस्थान के जेई राकेश बमराड़ा टीम के साथ करीब 11 बजे सबसे पहले त्रिशूल होटल पहुंचे। वहीं व्यापारियों ने हाईकोर्ट से शाम तक स्टे आने की बात जेई से कही। व्यापारियों ने जल संस्थान की टीम को त्रिशूल होटल के बजाय राज डीलक्स होटल पर आने को कहा। होटल व्यवसायियों ने जेई से बिना कनेक्शन काटे वहां से जाने को कहा। बताया जा रहा है कि जेई होटल के अंदर वार्ता करते रहे, तो वहीं दूसरी ओर कर्मचारियों ने बाहर कटर लगाकर पानी कनेक्शन बंद करने का काम शुरू कर दिया। इस पर मौजूद व्यापारी एकमत होकर कनेक्शन काटे जाने का विरोध करने लगे। बताया जा रहा है कि इस दौरान जेई के साथ धक्का मुक्की हो गई। जिस पर जेई ने आरोप लगाया कि पुलिस का सहयोग नहीं मिलने के चलते हुए वहां से लौट गए। वहीं जल संस्थान के अधिकारियों के साथ धक्का मुक्की की सूचना पुलिस अधिकारियों को मिली। इस पर सीओ सिटी प्रकाश देवली नगर कोतवाली की पुलिस के साथ पहुंचे और मामले की जानकारी ली। जिस पर सीओ सिटी ने जल संस्थान के अधिकारियों को कार्रवाई के लिए दोबारा से आने के लिए बुलाया। दोपहर तीन बजे तक कोई नहीं पहुंच सका। इस मौके पर व्यापारियों में प्रदीप चौधरी, सुुरेश गुलाटी, विकास तिवारी, महेश गौड़, संदीप शर्मा, कैलाश केशवानी, सुभाष चंद, प्रदीप कालरा, संजय त्रिवाल, संजीव नैय्यर, शिवकुमार कश्यप आदि शामिल हुए।
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होटल संचालकों ने यह प्रकरण बताया
हरिद्वार होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष आशुतोष शर्मा ने बताया कि अप्रैल से प्रकरण चल रहा था। जिस पर लगातार अन्य प्रक्रिया पूरी की जा रही थी। जल संस्थान और ऊर्जा निगम के द्वारा नोटिस देने पर हाईकोर्ट में अपील दायर कर स्टे के लिए आग्रह किया। अपील पर स्टे मिलने का आदेश की छाया प्रति दो बजे मिल गई थी। इसके बावजूद भी जल संस्थान के अधिकारी मानने को तैयार नहीं थे। दोपहर बाद साढ़े चार बजे स्टे की कॉपी जल संस्थान के अधिकारियों को उपलब्ध करा दी। स्टे 27 अगस्त तक के लिए मिला। इस बीच अन्य प्रक्रिया पूरी कराने का समय मांगा गया है। आशुतोष ने बताया कि जल संस्थान के अधिकारियों के साथ कोई धक्कामुक्की नहीं की। सीसीटीवी में रिकार्डिंग है। आरोप निराधार है।