उदासीन संप्रदाय के संस्थापक आचार्य जगद्गुरु श्रीचंद्र महाराज के 522वीं जयंती समारोह के पहले दिन भव्य शोभायात्रा निकाली गई। योग गुरु बाबा रामदेव ने भी शोभायात्रा में शामिल हुए।
चंद्राचार्य चौक पर प्रतिमा पूजन के बाद अपने संबोधन में बाबा रामदेव ने कहा कि महापुरुषों की प्रेरणा पूरे राष्ट्र के लिए कल्याणकारी होती है। भगवान श्रीचंद्र ने देशव्यापी भ्रमण करते हुए धर्म एवं संस्कृति के सापेक्ष आचरण का संदेश दिया। उदासीन अखाड़े उन्हीं की परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत नरेंद्र गिरी ने कहा कि भारतीय संस्कृति अद्भुत है।
देवभूमि उत्तराखंड इस संस्कृति की उद्गम स्थली है। इस भूमि पर हुए समारोह का संदेश संपूर्ण विश्व तक फैलता है। महामंडलेश्वर सुरेश्वर मुनि ने कहा कि उदासीन संप्रदाय भारतीय परंपराओं के संवर्धन के लिए काम कर रहा है। शोभायात्रा से पूर्व एकत्रित संतों एवं नेताओं ने प्रतिमा पूजन किया। इनमें स्वामी महंत भगतराम, श्रीमहंत मोहनदास, हरिचेतनानंद, बलवंत सिंह, विधायक मदन कौशिक, जगदीश लाल पाहवा, मोहनदास रामायणी, रविन्द्र पुरी, सुरेन्द्र मुनि, डा. श्याम सुंदर दास शास्त्री, कपिल मुनि, भगवानदास, महंत दुर्गादास, महंत विष्णुदास आदि प्रमुख थे। कनखल के बड़े और छोटे अखाड़े में अनेक कार्यक्रम चल रहे हैं। कार्यक्रम में जिलाधिकारी हरबंश सिंह चुघ भी शामिल हुए।