Iप्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित कर दी गई संयोजकों को विधिवत जानकारी
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उत्तराखंड संस्कृत अकादमी की ओर से प्रदेश के 13 जिले में 95 विकासखंडों में आयोजित होने वाली छह संस्कृत स्पर्धाओं संस्कृत नाटक, संस्कृत समूहगान, संस्कृत समूहनृत्य, संस्कृत वाद-विवाद, संस्कृत आशुभाषण, संस्कृत श्लोकोच्चारण की रूपरेखा बनाई गई। इसके तहत एक प्रशिक्षण कार्यक्रम बुधवार को आयोजित किया गया। इसमें जनपद संयोजक, सहसंयोजक और खंड संयोजकों को विधिवत जानकारी दी गई।
प्रशिक्षण में अकादमी के सचिव डाॅ. आनन्द भारद्वाज ने कहा कि संयोजक इन संस्कृत स्पर्धाओं के मुख्य सूत्रधार हैं। इन स्पर्धाओं के माध्यम से प्रदेशभर के छात्र-छात्राओं, शिक्षकों और जनमानस को संस्कृत भाषा से जोड़ने का भी कार्य किया जाएगा। उन्होंने कहा कि संयोजक अपने-अपने जनपदों व विकास खंडों के जिला शिक्षा अधिकारी, खंड शिक्षा अधिकारियों के माध्यम से अधिक से अधिक छात्र-छात्राओं को इस स्पर्धा से जोड़ने का कार्य करेंगे। कार्यक्रम के प्रदेश समन्वयक अकादमी के शोध अधिकारी डाॅ. हरिशचन्द्र गुरुरानी ने स्पर्धा के नियम, मुख्य नियम व उपनियमों को बताया। उन्होंने कहा कि छह प्रकार की संस्कृत स्पर्धाएं दो वर्ग कनिष्ठ और वरिष्ठ वर्ग में आयोजित की जाएंगी। कनिष्ठ वर्ग में कक्षा छह से 10 और वरिष्ठ वर्ग कक्षा 11 से स्नातकोत्तर तक के छात्र-छात्राएं प्रतिभाग करेंगें। इसके संबंध में अकादमी की वेबसाइट पर भी जानकारी उपलब्ध है।
Iस्पर्धा की तिथियों का हुआ निर्धारणI
पूरे प्रदेश के सभी ब्लाॅक में 11 व 12 नवम्बर और सभी जनपदों में 21 व 22 नवम्बर को स्पर्धा होगी। इसी तरह राज्य स्तर पर हरिद्वार में 3 से 4 दिसम्बर को संस्कृत स्पर्धाओं का आयोजन होगा। खंड स्तर पर प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले प्रतिभागी जनपद स्तर पर और जनपद स्तर पर प्रतिभाग करने वाले प्रतिभागी राज्य स्तर पर प्रतिभाग करेंगे। संस्कृत स्पर्धा प्रशिक्षण कार्यक्रम के प्रदेश सह समन्वयक अकादमी के प्रकाशन अधिकारी किशोरी लाल रतूड़ी ने बताया कि प्रदेश के 13 जनपदों के लिए 20 जनपद संयोजक, सहसंयोजक और 95 विकास खंडों के 81 खंड संयोजकों सहित कुल 101 संयोजक, सहसंयोजकों ने प्रशिक्षण कार्यशाला में प्रतिभाग किया।