हरिद्वार। पतंजलि आयुर्वेद महाविद्यालय का वार्षिक सांस्कृतिक महोत्सव में योग गुरु बाबा रामदेव ने कहा वह दिन दूर नहीं जब देश में स्वदेशी ज्ञान, स्वदेशी शिक्षा, स्वदेशी परंपराओं, स्वदेशी तकनीक, स्वदेशी विज्ञान, स्वदेशी अर्थनीति का बोलबाला होगा। सोमवार को वार्षिकोत्सव पर आयुर्वेद से जुड़ी अनेक प्रतियोगिताएं कराई गई। प्रतियोगिताओं के सफल प्रतिभागियों को पुरस्कृत भी किया गया।
इस दौरान स्वामी रामदेव ने कहा कि भारत जन्मजात आयुर्वेदिक राष्ट्र है। देश की सांस्कृतिक परंपरा में करोड़ों वर्षों से अनुसंधानरत ऋषियों के प्राण यहां की वनस्पतियों में बसते हैं। हमें उन प्राणों को देश के करोड़ों जनों के प्राण से जोड़कर उन्हें निरोग और किसान को समृद्धशाली बनाना है। उन्होंने कहा कि देश की जनता का स्वदेशी प्रेम अब उनके घरों में प्रयोग होने वाली वस्तुओं, किचन के खाद्य पदार्थों आदि से अभिव्यक्त हो रहा है। पंतजलि योगपीठ के महामंत्री आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि विश्व में नई विचारधारा, नई जीवन पद्धति और नई सोच पैदा करने वाली ऋषियों की परंपरा रही है। पतंजलि आयुर्वेद महाविद्यालय की संकल्पना में गुंथे इन परिवर्तनकारी तत्वों को छात्रा-छात्राओं को अहसास करना चाहिए। उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय, देहरादून के कुलपति डा. सत्येंद्र प्रसाद मिश्र ने कहा कि स्वामी रामदेव और आचार्य बालकृष्ण ने अपने पतंजलि आंदोलन द्वारा भारतीय योग-आयुर्वेद में आंदोलनात्मक एवं क्रियात्मक शक्ति पैदा की। इसे देश के लाखों लोगों के स्वास्थ्य से जोड़ा। उत्तरांचल आयुर्वेद महाविद्यालय के रजिस्ट्रार मृत्युंज्य मिश्रा ने भी पतंजलि महाविद्यालय के प्रयासों को सराहा। कार्यक्रम की अध्यक्षता पतंजलि आयुर्वेद महाविद्यालय के प्राचार्य डा. डीएन शर्मा ने की। महाविद्यालय के छात्रा-छात्राओं ने अनेक सांस्कृतिक कार्यक्रम से राष्ट्र निर्माण की प्रेरणाएं उभारीं। समूह चर्चा, रंगोली, ताइकवांडो व अनेक सांस्कृतिक प्रतियोगिताओं का भी आयोजन किया गया। ।