हाल में मचे बवाल के चलते अखाड़ा परिषद ने चर्चित राधे मां और सच्चिदानंद के नासिक कुंभ में जाने पर प्रतिबंध लगा दिया है। इसके बावजूद अखाड़ा परिषद की राह आसान नहीं है। दो परिषदों के चलते कोई एक निर्णय लेना असंभव है। अंतिम फैसले के लिए अब कई संगठन बैठक बुलाने लगे हैं।
गौरतलब है कि इस समय दो अखाड़ा परिषद चल रही हैं। एक अखाड़ा परिषद में 10 अखाड़े हैं, जिनका नेतृत्व श्रीमहंत नरेंद्र गिरि के पास है। पहले से चली आ रही दूसरी अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष करीब एक दशक से श्रीमहंत ज्ञानदास हैं। इस परिषद में अब बैरागियों के तीन अखाड़े शेष रह गए हैं। ज्ञानदास ने 25 अगस्त को नासिक में एक बैठक बुलाई है।
इसमें फर्जी संतों के बारे में निर्णय लिया जाएगा। यह निर्णय श्रीमहंत नरेंद्र गिरि की अध्यक्षता वाली परिषद भी मानेगी, इस बात के कोई आसार नहीं हैं। दोनों परिषदों के अधिकार को लेकर गहरे मतभेद हैं। उधर, अखिल भारतीय संत समिति के राष्ट्रीय प्रवक्ता बाबा हठयोगी दिगंबर ने भी कांवड़ मेले के तत्काल बाद 13 अगस्त को हरिद्वार के जयराम आश्रम में प्रमुख संतों की बैठक बुलाई है।
इसमें संत जगत को पदनाम करने वाले कुछ नाम उजागर किए जाएंगे। सूत्रों के अनुसार षडदर्शन साधु समाज परिषद और भारत साधु समाज संस्था द्वारा भी निकट भविष्य में इन्हीं मुद्दों को लेकर बैठकें बुलाई जा रही हैं। जाहिर है अलग-अलग हो रही बैठकों के निर्णय भी अलग होंगे। तब फर्जी संतों पर निर्णयों का कितना असर पड़ेगा यह सहज समझा जा सकता है।