नगर आयुक्त अशोक पांडेय ने नगर निगम के विवादित प्रकरणों में जांच बैठा दी है। नगर आयुुक्त ने नजूल संपत्ति करणी भवन धर्मशाला को खुर्द-बुर्द करने के प्रकरण, नगर आयुक्त के आवासीय परिसर के साथ निर्माणाधीन पर्यटन विभाग के राज्य अतिथिगृह के भूमि प्रकरण तथा समाचार पत्रों के सरकारी विज्ञापन के रेट की जांच के लिए जांच कमेटियां गठित की हैं।
नगर आयुक्त अशोक पांडेय ने जांच कमेटियां गठित करने की पुष्टि की है। इससे पहले ईंधन (तेल) का अनाप-शनाप खर्च बढ़ने की जांच के लिए कमेटी गठित की गई थी। सूत्रों ने बताया कि तत्कालीन नगर आयुक्त की सख्ती से नगर निगम का ईंधन खर्च प्रतिमाह घटकर 5 से 6 लाख रुपये पर आ गया था, जो फिर से 8 से 9 लाख रुपये को पार करने लगा है। इसके बाद ही नगर आयुक्त ने सहायक नगर अधिकारी, अधिशासी अभियंता, मुख्य नगर स्वास्थ्य अधिकारी की जांच टीम गठित की है। नजूल संपत्ति करणी भवन धर्मशाला मामले में अमर उजाला में छपी खबर का संज्ञान लेते हुए जांच कमेटी गठित की गई है।
सरकारी नजूल की करोड़ों रुपये मूल्य की संपत्ति में अवैध रूप से नगर निगम की ओर से नाम परिवर्तन करने का मामला भी जांच में उजागर हुआ था। नगर आयुक्त ने बताया कि जांच कमेटी सभी तथ्यों की जांच कर रिपोर्ट देगी। इसके साथ ही नगर आयुक्त आवास व विकास प्राधिकरण मुख्यालय के बीच की भूमि पर निर्माणाधीन राज्य अतिथिगृह को दी भूमि की पैमाइश कर रिपोर्ट देने के लिए अलग से एक कमेटी बनाई गई है। मेयर मनोज गर्ग को भी शिकायत है कि पर्यटन विभाग अधिक भूमि घेर रहा है।