यह कोई पहला मामला नहीं है जब अवैध खनन के छींटों से खाकी का दामन दागदार हुआ हो। फेरुपुर चौकी पुलिस पर की गई कार्रवाई ने एक बार फिर इतिहास दोहराया है। पहले भी इस एसओ, चौकी प्रभारी से लेकर कई पुलिसकर्मियों को हटाया गया था। तब सीओ रहे जेआर जोशी को भी एसएसपी कार्यालय से अटैच किया गया था। फेरुपुर चौकी के अलावा लक्सर, श्यामपुर और बुग्गावाला में भी पुलिस पर खनन माफियाओं को पालने-पोसने का आरोप समय- समय पर सच साबित होता रहा है।
हैरानी वाली बात ये है कि अवैध खनन को संरक्षण देने में फेरुपुर पुलिस चौकी इतनी वफादारी से काम कर रही थी कि उन्होंने पुलिस कप्तान की ही आंखों में धूल झोंकने की जुर्रत कर ली। फेरुपुर चौकी पुलिस अपने मुखिया को ही गुमराह करने में जरा भी नहीं हिचकिचाई। साफ है कि खनन से होने वाली कमाई में से मलाई पुलिस भी चाट रही होगी। इतिहास के पन्नों को पलटें तो वर्ष 2013 में भी तब एसएसपी रहे अरुण मोहन जोशी ने अवैध खनन में संलिप्तता के चलते सीओ जेआर जोशी को एसएसपी कार्यालय अटैच किया था और एसओ टीएस राणा, चौकी प्रभारी विद्यादत्त जोशी समेत कई पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर किया था।
सिपाहियों के भी चल रहे ट्रेक्टर
पथरी और लक्सर में तैनात कई पुलिस कर्मियों के ट्रैक्टर ट्राली भी चलते हैं। आरोप तो ये भी है कि वे खुद पीछे रहकर खनन के पट्टों की बागडोर संभालते हैं। सत्र बताते हैं कि एक- दो सिपाही तो ऐसे है जिनके नजदीकियों के एक दर्जन से अधिक ट्रेक्टर ट्रालियां हैं।
बिन खद्दरधारी खनन अधूरा
अवैध खनन का धंधा राजनीतिक संरक्षण के बिना नहीं फल- फूल सकता है। जो भी दल सत्ता में होता है उसके ही रसूखदार नेता अवैध खनन की कमान संभालते हैं। फिलवक्त भाजपा के तीन विधायकों के खनन के धंधे पर अपना होल्ड कर लेने की चर्चा बनी हुई है।
पहले ही गिर जाती गाज
गंगा रक्षा के लिए आंदोलित संस्था मातृ सदन के परमाध्यक्ष स्वामी शिवानंद सरस्वती ने दो माह पहले सीओ लक्सर रहे अव्वल सिंह रावत और चौकी प्रभारी लखपत सिंह बुटोला के अवैध खनन के धंधे में लिप्त होने की शिकायत डीजीपी से की थी। डीजीपी को की गई शिकायत के बाद जांच की रफ्तार कितनी सुस्त थी कि तीन दिन पहले एसपी क्राइम शाहजहां जावेद खान स्वामी शिवानंद के बयान लेने के लिए आश्रम पहुंची थी। यदि पहले ही जांच हो गई होती तो चौकी प्रभारी पर पहले ही गाज गिर गई होती।
ये करते है पुलिसवाले
अवैध खनन बकायदा पुलिस की सेटिंग गेटिंग से होता है। यदि उच्च अफसरान को शिकायत होती है तो निचले स्तर के पुलिसकर्मी खनन माफियाओं को आगाह कर देते हैं। वे खुद पहुंचकर बता देते हैं कि यहंा से चले जाओ। बड़े साहब को इस बारे में शिकायत की गई है। या फिर वे दिखावे के तौर पर एक दो ट्रैक्टर ट्राली पकड़ लेते हैं ताकि साहब की नजर में भी इमेज बनी रहे।